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1) एचआईवी क्या है?
एचआईवी का मतलब है ह्यूमन इम्यूनो डिफिशंसी वाइरस
(मानव की रोग प्रतिरक्षा शक्ति को कम करने वाला विषाणु)। एचआईवी एक रेट्रोवाइरस है जो मानव रोग प्रतिरक्षा प्रणाली की कोषिकाओं (मख्यत: सीडी 4 पाजिटिव टी कोषिकाएं जो कोषिकीय रोग प्रतिरक्षा प्रणाली के मुख्य घटक हैं) को संक्रमित करता है, और उनके कार्यचालन को नष्ट या क्षतिग्रस्त कर देता है। इस विषाणु से संक्रमित होने पर रोग प्रतिरक्षा प्रणाली धीरे-धीरे करके शक्तिहीन हो जाती है जिससे 'रोग प्रतिरक्षा की कमी' हो जाती है।
रोग प्रतिरक्षा प्रणाली में कमी तब मानी जाती है जब वह संक्रमण और रोगों से लड़ने की अपनी भूमिका निभाने में अक्षम हो जाती है। जिन लोगों की रोग प्रतिरक्षा प्रणाली में कमी होती है उन्हें ऐसे अनेक प्रकार के संक्रमण आसानी से हो जाते हैं जो संक्रमण स्वस्थ रोग प्रतिरक्षा प्रणाली वाले लोगों को कभी-कभार ही होते हैं। रोग प्रतिरक्षा प्रणाली में गंभीर कमी से होने वाले रोगों को 'अवसरवादी संक्रमण' कहते हैं क्योंकि वे कमजोर हो चुकी रोग प्रतिरक्षा प्रणाली का फायदा उठाते हैं।
2) एड्स क्या है?
एड्स का अर्थ है 'एक्वायर्ड इम्यूनोडिफिशंसी' सिंड्राम' और यह रोग प्रतिरक्षा प्रणाली की कमी से जुड़े लक्षणों और संक्रमणों के समूह को प्रकट करता है। यह सिध्द हो चुका है कि एचआईवी संक्रमण ही एड्स का मूल कारण होता है। शरीर में एचआईवी की मात्रा और कुछ संक्रमणों के प्रकट होने को आम तौर पर इस बात के संकेतक माना जाता है कि एचआईवी संक्रमण अब बढ़ कर एड्स बन गया है। 3) एचआईवी के लक्षण क्या-क्या हैं?
एचआईवी से संक्रमित अधिकतर लोगों को यह मालूम नहीं होता कि वे संक्रमित हो चुके हैं क्योंकि आरंभिक संक्रमण के तत्काल बाद कोई लक्षण प्रकट नहीं होते। कुछ लोगों को गिलटी वाले बुखार जैसी बीमारी होती है (जिसके साथ बुखार और चकत्तो, जोड़ों में दर्द और लसीका ग्रंथियों का बढ़ना देखने में आता है) जो सेरोकन्वर्जन के समय हो सकती है। सेरोकन्वर्जन का अर्थ है एचआईवी के एंटीबाडीज बनना, और यह अक्सर संक्रमण के 6 सप्ताह से 3 महीने के बीच होता है।
इस तथ्य के बावजूद कि एचआईवी संक्रमण के कोई आरंभिक लक्षण नहीं होते, एचआईवी संक्रमित व्यक्ति अत्यधिक संक्रामक हो सकता है और विषाणु को किसी दूसरे व्यक्ति में संचरित कर सकता है। एचआईवी-जांच कराना ही किसी व्यक्ति के शरीर में एचआईवी की उपस्थित को निर्धारित करने का एकमात्र तरीका है।
एचआईवी संक्रमण रोग प्रतिरक्षा प्रणाली को धीरे-धीरे करके कमजोर बनाता है। इससे शरीर को संक्रमण होने की संभावना बढ़ जाती है और एड्स हो सकता है।
4) किसी व्यक्ति को एड्स कब होता है?
एड्स शब्द का उपयोग एचआईवी संक्रमण की अत्यधिक विकसित अवस्थाओं के लिए किया जाता है। एचआईवी से संक्रमित अधिकतर लोगों में, उपचार न मिलने पर, 8-10 वर्ष के भीतर एड्स के लक्षण प्रकट होते हैं। एड्स को विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा समूहित कतिपय संक्रमणों के आधार पर पहचाना जाता है:
पहली अवस्था - एचआईवी के रोग-लक्षण प्रकट नहीं होते और उसे एड्स नहीं कहा जा सकता।
दूसरी अवस्था - इसमें छोटेमोटे म्यूकोक्युटेनस लक्षण दिखते हैं और बार-बार ऊपरी श्वसन पथ के संक्रमण होते हैं।
तीसरी अवस्था - इसमें एक महीने से अधिक समय तक अकारण बार-बार दस्त लगते हैं, गंभीर रोगाणु संक्रमण होते हैं और फेफड़े की टीबी होती है।
चौथी अवस्था - इसमें मस्तिष्क का टोक्सोप्लाज्मोसिस, ग्रसनी, श्वसन नली या फेफड़ों का कैंडिडियासिस और कापोसीज सरकोमा जैसे लक्षण प्रकट होते हैं; और इन्हें एड्स के संकेतक माना जाता है।
ये अधिकतर स्थितियां अवसरवादी संक्रमण हैं। यदि ये स्वस्थ व्यक्ति को हों तो इनका आसानी से उपचार किया जा सकता है।
इसके अलावा सेंटर फार डिसीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (सीडीसी) ने एड्स की परिभाषा प्रति 3 मिमी. रक्त में सीडी 4 पाजिटिव टी कोषिकाओं की 200 से कम संख्या के आधार पर एड्स को परिभाषित किया है। सीडी 4 पाजिटिव की कोषिकाएं संक्रमण होने पर प्रभावकारी रोग प्रतिरक्षा द्वारा जवाबी हमले की दृष्टि से महत्वपर्ण होते हैं।
एंटीरेट्रोवाइरल (एआरवी) चिकित्सा आरंभ करने के लिए विश्व स्वास्थ्य संगठन की अनुशंसाएं उक्त परिभाषाओं पर आधारित है। उसकी अनुशंसा यह है कि उक्त संक्रमणों वाले या/अथवा प्रति 3 मिमी रक्त में 200 से कम टी कोषिका वाले एचआईवी-संक्रमित किशोरों और वयस्कों को एआरवी चिकित्सा आरंभ कर देनी चाहिए।
5) एचआईवी से संक्रमित लोगों की कितनी तेजी से एड्स होता है?
अलग-अलग व्यक्तियों के मामले में यह समय काफी अलग-अलग हो सकता है। स्वस्थ जीवन शैली अपनाने पर एचआईवी संक्रमण और एड्स से रोगग्रस्त होने के बीच का समय 10-15 वर्ष और कभी-कभी उससे भी अधिक हो सकता है। एआरवी चिकित्सा संक्रमित शरीर में विषाणुओं की संख्या को घटाकर एड्स की दिशा में प्रगति को धीमा कर सकती है।
6) एचआईवी कहां मिलता है?
एचआईवी शरीर के तरलों में पाया जाता है जैसे कि रक्त, वीर्य, योनि-तरल, प्रमस्तिष्क मेरुदंड तरल और स्तनों का दूध।
7) एचआईवी किस प्रकार संचरित हो सकता है?
एचआईवी प्रवेशकारी (गुदा या योनि) संभोग और मुख संभोग; रक्त चढ़ाने; अस्पतालों में दूसरों के लिए प्रयुक्त संदूषित सुइयों के उपयोग और एक दूसरे की नशीली दवा की सुई लगाने से हो संचरित हो सकता है; साथ ही यह गर्भावस्था, प्रसव और स्तनपान के दौरान मां से बच्चे में संचरित हो सकता है
8) यौन कार्यों के माध्यम से एचआईवी कैसे संचरित हो सकता है?
एचआईवी असुरक्षित प्रवेशकारी यौन संपर्क के माध्यम से संचरित हो सकता है। यौन संसर्ग के माध्यम से संक्रमित होने की संभावनाओं का आकलन करना तो कठिन है, पर यह ज्ञात है कि योनि संभोग के माध्यम से संक्रमण का खतरा अधिक होता है। यह कहा गया है कि गुदा योनि संभोग की तुलना में गुदा संभोग से संचरण 10 गुना अधिक होता है। जिस व्यक्ति को अनुपचारित यौन संचरित संक्रमण जिसमें घाव हों और पानी रिसता हो, यौन संपर्क के दौरान उस व्यक्ति द्वारा दूसरों को संक्रमित करने या खुद उसके संक्रमित होने की संभावना 6-10 गुनी होती है।
मुख संभोग को एचआईवी संचरण की दृष्टि से कम जोखिमपूर्ण यौन कार्य माना जाता है। पर अगर मुंह के भीतर या चारों ओर घाव या फोड़े हों और स्खलन मुंह में ही हो जाय तो खतरा बढ़ जाता है।
9)सुइयां या सीरिंजें एचआईवी को कैसे संचरित कर सकती है?
सुइयों या सीरिंजों का पुन: उपयोग करने या मिलजुल कर उपयोग करने एचआईवी आसानी से संचरित हो जाता है। यदि नशीली दवाओं का इंजेक्शन लगाने वाले हर बार नई सुई और सीरिंज का उपयोग करें या पुन: उपयोग करने से पहले उन्हें विसंक्रमित (स्टेरिलाइज) कर लें तो संचरण के खतरे को काफी कम किया जा सकता है। स्वास्थ्य देखरेख प्रदान करने वाले अस्पतालों या स्वास्थ्य केंद्रों में सार्वभौम सावधानियों का पालन करके संचरण को कम कर सकते हैं।
10) मां से बच्चे में एचआईवी का संचरण (एमटीसीटी) कैसे होता है?
गर्भधारण, प्रसव वेदना, प्रसव और स्तनपान के दौरान शिशु में एचआईवी का संचरण हो सकता है। प्रसव के पहले और प्रसव के दौरान आम तौर पर मां से बच्चे को संचरण का 15-30 प्रतिशत जोखिम रहता है बहुत से कारक, विशेषकार प्रसव के समय माता के शरीर में विषाणु-भार संक्रमण के खतरे को प्रभावित करते हैं (विषाणु भार जितना अधिक होगा, खतरा भी उतना ही अधिक होगा)। जन्म के बाद स्तनपान के माध्यम से भी मां से बच्चे को संचरण हो सकता है। खतरा चिकित्सीय कारकों पर निर्भर होता है और स्तनपान के स्वरूप एवं अवधि के अनुसार अलग-अलग हो सकता है।
11) रक्त चढ़ाने से एचआईवी कैसे संचरित हो सकता है?
रक्त या रक्त-उत्पाद चढ़ाने से एचआईवी संक्रमण का अधिक जोखिम (90 प्रतिशत से अधिक) होता है। किंतु रक्त सुरक्षा मानकों का पालन करने से सभी जरूरतमंद रोगियों के लिए सुरक्षित, पर्याप्त और उत्तम गुणवत्ता वाले रक्त की व्यवस्था सुनिश्चित की जा सकती है। रक्त सुरक्षा में दान किये गये रक्त की, एचआईवी और अन्य रक्त-जनित पैथोजेन्स के लिए, जांच करना, साथ ही उपयुक्त रक्तदानकर्ता का चयन करना शामिल है।
12) एचआईवी कैसे संचरित नहीं हो सकता?
एचआईवी संक्रमित व्यक्ति के साथ हाथ मिलाने, उसके साथ एक ही ऑटो, टैक्सी या बस में सफर करने, एक ही प्लेट से खाने, एक ही गिलास से पानी पीने, उसके साथ खेलने, उस गले लगाने, चूमने से नहीं फैलता। मच्छर या अन्य कीड़ेमकोड़े इस विषाणु को नहीं फैलाते और न ही यह हवा या पानी के माध्यम से फैलता है।
एचआईवी निम्न कार्यों से भी नहीं फैलता:
- संक्रमित व्यक्ति द्वारा इस्तेमाल किये गये शौचालयों और मूत्रालयों का उपयोग करने से;
- छींकने या खांसने से;
- संक्रमित व्यक्ति के साथ काम करने से;
- जब चिकित्सा कर्मचारी एक ही बार इस्तेमाल होने वाले उपकरणों का प्रयोग करें तब रक्त देने या लेने से।
13) चुम्बन या गहन चुम्बन से एचआईवी होने का कितना जोखिम है?
मुंह पर चुंबन करने पर संचरण का खतरा काफी कम होता है; और ऐसा कोई प्रमाण नहीं मिला है जिसमें यह पता चले कि चुंबन द्वारा लार के माध्यम से यह विषाणु फैलता है।
14) शरीर पर छेदन करने या गुदने (टैटू) के माध्यम से एचआईवी होने का कितना खतरा होता है?
अगर संदूषित उपकरणों या विसंक्रमित न किये या फिर दूसरों द्वारा इस्तेमाल किये गये उपकरणों के इस्तेमाल से एचआईवी संचरण का खतरा होता। त्वचा में घुसाएं जाने वाले उपकरणों को एक ही बार इस्तेमाल करके फेंक दिया जाना चाहिए या फिर उन्हें अच्छी तरह से साफ और विसंक्रमित कर लेना चाहिए।
15) संक्रमित व्यक्ति द्वार प्रयुक्त रेजरों का उपयोग करने पर एचआईवी होने का कितना खतरा होता है?
विसंक्रमित न की गई रेजर या चाकू जैसी वस्तुओं से त्वचा काटने से एचआईवी संक्रमण हो सकता है। अत: एक दूसरे के रेजरों के उपयोग की तब तक सलाह नहीं दी जा सकती जब तक कि वे हर बार इस्तेमाल के बाद पूरी तरह विसंक्रमित न किये जाएं।
16) क्या एचआईवी केवल समलैंगिकों और नशीली दवा का उपयोग करने वालों को होता है?
नहीं। जो भी असुरक्षित यौन संपर्क करता है, दूसरों की सुइयों का उपयोग करता है, या संदूषित खून चढ़ाता है उसे एचआईवी हो सकता है। शिशु गर्भधारण, प्रसव वेदना-अवधि या प्रसव के बाद स्तनपान क समय अपनी मां से एचआईवी संक्रमण प्राप्त कर सकते हैं।
यह 90 प्रतिशत मामलों में एचआईवी यौन संचरण का परिणाम होता है और 60-70 प्रतिशत मामलों में यह स्त्री-पुरुष यौन संपर्क से होता है।
17) क्या किसी को देख कर यह पता लगाया जा सकता है कि उसे एचआईवी है?
किसी को देखकर आप यह पता लगा नहीं सकते कि उसे एचआईवी या एड्स है। एचआईवी-संक्रमित व्यक्ति स्वस्थ दिखाई दे सकते हैं। पर ऐसे व्यक्ति आपको एचआईवी विषाणु से संक्रमित कर सकते हैं। एचआईवी-संक्रमण का पता कोई भी व्यक्ति खून की जांच करवा कर ही लगा सकता है।
18) यौन संपर्क के दौरान एचआईवी-संक्रमण की रोकथाम कैसे की जा सकती है?
कोई भी व्यक्ति यौन संपर्क न करके, असंक्रमित यौन साझेदार के साथ आपसी रूप से निष्ठापूर्ण यौन संबंध बना कर यौन संपर्क के सुरक्षित तौर-तरीके अपना कर अपने को एचआईवी संक्रमण से बचा सकता है। यौन संपर्क को गैर-प्रवेशकारी संभोग और स्त्री/पुरुष कण्डोम के सतत एवं सही उपयोग द्वारा अधिक सुरक्षित बनाया जा सकता है।
19) एचआईवी की रोकथाम में कण्डोम कितने असरकारक होते हैं?
एचआईवी और अन्य यौन-संचरित संक्रमणों (एसटीआईज) से बचाने में इस समय उपलब्ध एकमात्र उत्पाद अच्छी गुणवत्तावाले कण्डोम हैं। अगर कण्डोमों का सही ढंग से उपयोग किया जाय तो पुरुषों और महिलाओं में एचआईवी संक्रमण की रोकथाम करने के वे परखे हुए और असरकारक साधन हैं।
पर कोई भी बचावकारी पध्दति 100 प्रतिशत असरकारक नहीं होती और कण्डोम किसी भी एसटीआई से पूरी सुरक्षा की गांरटी नहीं कर सकते। कण्डोमों के माध्यम से बचाव तभी हो सकता है जब उनका सही-सही और हमेशा उपयोग किया गया। गलत इस्तेमाल से ये फट सकते हैं और इस तरह इनका बचावकारी प्रभाव हो सकता है।
21) महिला कण्डोम क्या है?
महिला कण्डोम महिलाओं द्वारा नियंत्रित एकमात्र गर्भनिरोधक बाधा-पध्दति है। यह मजूबत, कोमल और पारदर्शी आवरण है जिसे संभोग से पहले योनि में घुसाया जाता है। यह योनि को पूरी तरह से ढक लेता है। और इसलिए इसका सही और सतत उपयोग गर्भधारण और एसटीआईज से रक्षा करता है। इसके न तो कोई साइटइफैक्ट्स हैं और न जोखिम। डॉक्टर की पर्जी लेने की जरूरत भी नहीं होती।
22) महिला कण्डोम का उपयोग किस तरह करना चाहिए?
कण्डोम को पाउच से सावधानी के साथ बाहर निकालें। अगर मन हो तो कण्डोम के बाहर और भीतर और भी चिकनाई लगाएं।
कण्डोम को योनि के भीतर डालने के लिए अपने घुटनों को एक दूसरे से अलग करके नीचे बैठें या फिर अपने एक पांव को स्टूल पर रख कर खड़े हो जाएं। कण्डोम को बाहर लटक रहे उसके मुंह से खोलें। ऊपर के घेरे को पकड़ कर कण्डोम को अपनी बीच की उंगली और अंगूठे से दबाएं।
अब अपनी तर्जनी (इंडेक्स फिंगर) को अपने अंगूठे और बीच की उंगलियों के बीच में रखें। इस स्थिति में उंगलियों को रखकर दूसरे हाथ से अपनी योनि के होंठों को फैलाएं और कण्डोम के बंद मुंह को उसके भीतर घुसाएं।
इसके बाद अपनी तर्जनी से धकेलते हुए कण्डोम की थैली को योनि तक घुसा दें। यह जांच कर लें कि कण्डोम का ऊपरी हिस्सा आपकी प्यूबिक अस्थि के ऊपर हो। इस बात का ध्यान भी रखें कि कण्डोम आपकी योनि के भीतर मुड़तुड़ न जाए। अगर वह मुड़भुड़ गया हो तो उसे वापस निकालें। और चिकनाई की एक-दो बूंदें डालकर उसे पुन: घुसाएं।
टिप्पणी : अगर आपका साझेदार अपने लिंग को कण्डोम की थैली के अगल-बगल या फिर उसके नीचे घुसा रहा हो तो उससे तत्काल लिंग वापस लेने को कहें। कण्डोम को निकाल कर फेंक दें और नया कण्डोम हस्तेमाल करें।
जब आपके यौन साझेदार का स्खलन हो जाए यानी उसका वीर्य निकल जाए और वह लिंग वापस निकाल ले तो शुक्रणुओं को कण्डोम की थैली के भीतर रखने के लिए उसके मुंह को दबाकर बंद कर दें। लिंग को धीरे-धीरे करके बाहर निकाले दें। कण्डोम को फेंक दें। (पर शौचालय या टोहलेट में न फेंकें)।
महिला कण्डोम के उपयोग की सलाह नहीं दी जाती।
23) नशीली दवा की सुई लगाने वाले एचआईवी के जोखिम को कैसे कम कर सकते हैं?
नशीली दवा का इंजेक्शन लगाने वालों के व्यक्तिगत और सार्वजनिक खतरों को कम करने के लिए निम्नलिखित कार्य किये जा सकते हैं:
- नशीली दवा मुंह से लें (इंजेक्शन लगाने की बजाय दूसरा तरीका अपनाएं);
- सुईयों या सीरिंजों का इस्तेमाल दुबारा न करें;
- नशीली दवा लेने के लिए हर बार नई सीरिंज या सुई का उपयोग करें;
- नशीली दवा बनाते समय ऐसे पानी का उपयोग करें जो साफ हो;
- ताजी अल्कोहलिक स्वाब का उपयोग करते साथ उस जगह से साफ करें जहां इंजेक्शन या सुई लगी है।
24) मां से बच्चों को संचरण की रोकथाम कैसे करें?
निम्न उपायों से मां से बच्चे को संचरण की रोकथाम की जा सकती है;
उपचार
यह स्पष्ट है कि अल्पकालिक एंटीरेट्रोवाइरल रोकथामकारी उपचार मां से बच्चे को एचआईवी संचरण की रोकथाम की एक असरकारक और व्यवहार्य पध्दति है। जब इसे शिशु आहार परामर्श एवं सहायता और सुरक्षित शिशु आहार पध्दतियों के उपयोग के साथ जोड़ कर अपनाया जाता है तो इससे शिशु के संक्रमित होने का खतरा आधा हो जाता है। एआरवी चिकित्सा मुख्यत: नेविरापाइन और ज़िडोवुडाइन के उपयोग पर आधारित है। प्रसव के समय माता को और जन्म के 72 घंटों के भीतर शिशु को नेविरापाइन की एक-एक खुराक दी जाती है। यदि गर्भधारण के अंतिम छह महीनों में और प्रसव वेदना के दौरान अत:शिरा माध्यम से माता को तथा जन्म के छह सप्ताह के भीतर शिशु को ज़िडोवुडाइन दी जाय तो इससे संचरण का खतरा कम होता है। अगर ज़िडोवुडाइन माता के प्रसव के समय के पास गर्भधारण की अंतिम अवस्था में दी जाए तब भी संचरण का खतरा आधा हो जाता है। कुल मिलकर विभिन्न दवा उपचारों की प्रभावोत्पादकता तब कम हो जाती है जब शिशु का स्तनपान के दौरान एचआईवी के संपर्क में आना जारी रहता है।
एंटीरेट्रोवाइरल दवाएं चिकित्सक की निगरानी में ही ली जानी चाहिए।
सीजेरियन शल्यक्रिया
सीजेरियन शल्यक्रिया एक सर्जिकल प्रक्रिया है जिसमें शिशु को मां के उदर की भित्तिा और गर्भाशय में छेद करके बाहर निकाला जाता है। यह माना जाता है कि मां से बच्चे को हुए संचरण से संक्रमित शिशुओं में से दो-तिहाई शिशु गर्भधारण के दौरान या प्रसव के समय के आसपास संक्रमित होती है। योनि के माध्यम से प्रसव की स्थिति में मां से बच्चे की संचरण की संभावना बढ़ जाती है, सीजेरियन शल्यक्रिया के मामले में यह जोखिम कम होता है। किंतु इसे संभावित लाभों पर मां को खतरे के संदर्भ में देखा जाना चाहिए।
स्तनपान कराने से बचना
जब बच्चा स्तनपान करता है तब मां से बच्चे को संचरण का खतरा बढ़ जाता है। हालांकि मां का दूध बच्चे के लिए सबसे अधिक पोषक होता है, पर यह अनुशंसा की जाती है कि एचआईवी-पाजिटिव माताएं, शिशु को संचरण के खतरे को कम करने के लिए अपने दूध की जगह शिशुओं के लिए बाजार में उपलब्ध आहार दें। किंतु इसकी सलाह तभी दी जाती है अगर इससे बच्चे की पोषण संबंधी जरूरतें पूरी होती हों और इस आहार को साफ-सफाई के साथ तैयार किया जाए और परिवार इसका खर्चा उठा सकें।
विश्व स्वास्थ्य संगठन ने इस संबंध में निम्नलिखित सिफारिशें की हैं:
जब मां के दूध का स्तनपान आहार देना स्वीकार्य, व्यवहार्य, कम खर्चीला, टिकाऊ और सुरक्षित हो तभी एचआईवी-संक्रमित द्वारा स्तनपान कराना छोड़ने की अनुशंसा की जाती है। अन्यथा जीवन के आरंभिक महीनों के दौरान केवल स्तनपान कराने और जितना शीघ्र संभव हो इसे करने की सिफारिश की जाती है।
25) स्वास्थ्य केंद्रों और अस्पतालों में संचरण को रोकने के लिए स्वास्थ्य देखरेख कार्यकर्ता को क्या कार्य प्रक्रियाएं अपनानी चाहिए?
स्वास्थ्य देखरेख कार्यकर्ता को ''सार्वभौम सावधानियों'' का पालन करना चाहिए। ''सार्वभौम सावधानियों'' संक्रमण-नियंत्रण के मार्गनिर्देश हैं जिन्हें स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं और उनके रोगियों को रक्त और कुछ शारीरिक तरलों से फैलने वाले रोगों के संपर्क में आने से बचाने के लिए तैयार किया गया है।
ये ''सार्वभौम सावधानियां'' इस प्रकार हैं:
- नुकीले उपकरणों (सुई त्वचा में घुसाई जाने वाली सुई, छुरी, ब्लेड, चाकू छेदने और चीरने वाले उपकरण, टूटे कांच नाखून आदि जैसे उपकरण जिनसे कटने या घावों के छिदने का खतरा होता है) का सावधानीपूर्वक उपयोग और निबटान;
- सभी कार्यों के बाद साबुन से हाथ धोना;
- रक्त या अन्य शारीरिक तरलों के संपर्क में आने पर दस्ताने, गाउन, ऐप्रन, मास्क, गागल्स जैसे बचावकारी उपकरणों का उपयोग;
- रक्त और शारीरिक तरलों से संदूषित कचरे का सुरक्षित निबटान;
- उपकरणों और संदूषित औजारों को उपयुक्त तरीके से विसंक्रमित (डिसइंफेक्शन) करना।
- मैले या धब्बे लगे कपड़ों को उचित प्रकार से संभालना।
इसके अलावा, यह सिफारिश भी की जाती है कि सभी स्वास्थ्य देखरेख कार्यकर्ताओं को सुइयों, छुरियों और अन्य नुकीले उपकरणों या औजारों से घायल होने से बचने के लिए सावधानी बरतनी चाहिए। सार्वभौम सावधानियों के अनुसार सभी व्यक्तियों के रक्त और शारीरिक तरलों को एचआईवी से संक्रमित मानकर चलना चाहिए - चाहे व्यक्ति की एचआईवी संबंधी स्थिति ज्ञात ही क्यों न हो।
26) क्या दो संक्रमित व्यक्तियों के लिए केवल एक दूसरे के साथ असुरक्षित यौन-संपर्क करना सुरक्षित है?
नहीं, दो एचआईवी-संक्रमित व्यक्तियों के लिए एक दूसरे के साथ असुरक्षित यौन संपर्क करना सुरक्षित नहीं है क्योंकि उन्हें अन्य प्रकार के एचआईवी से पुन: संक्रमण हो सकता है या उन्हें अन्य यौन संचरित संक्रमण (एसटीआईज) हो सकते हैं। दोनों यौन साझेदारों के संक्रमित होने पर भी कण्डोम के उपयोग की सलाह दी जाती है।
27) एचआईवी जांच क्या है?
एचआईवी जांच एक ऐसी जांच है जो यह पता लगाती है कि शरीर में एचआईवी मौजूद है या नहीं। सामान्य तौर पर उपयोग की जाने वाली एचआईवी जांचें एचआईवी के प्रत्युत्तार में रोग प्रतिरक्षा प्रणाली द्वारा पैदा किये गये एंटीबाडीज का पता लगाती है। क्योंकि इनका पता लगाना खुद एचआईवी का पता लगाने से ज्यादा आसान (और कम खर्चीला) होता है। शरीर एंटीबाडीज किसी संक्रमण के प्रत्युत्तार में पैदा करता है।
28) एचआईवी के संपर्क में आने के बाद एचआईवी जांच के लिए कितने समय तक इंतजार करना चाहिए?
आम तौर पर यह सलाह दी जाती है कि एचआईवी के संभावित संपर्क में आने के बाद तीन महीने तक इंतजार करना चाहिए। हालांकि एचआईवी-एंटीबाडी जांच बहुत ही संवेदनशील होती है, पर एचआईवी संक्रमण और इसके खोजे जा सकने वाले एंटीबाडीज के प्रकट होने के बीच 3 से 12 सप्ताह तक की अवधि होती है जिसे 'विंडो पीरियड' या विंडो अवधि कहते हैं। सर्वाधिक संवेदनशील एचआईवी जांचों के मामले में यह विंडो अवधि लगभग 3 सप्ताह की होती है। कम संवेदनशील जांचों के मामले में यह अवधि अधिक लंबी हो सकती है।
इस विंडो अवधि के दौरान, एचआईवी से संक्रमित लोगों के रक्त में ऐसे एंटीबाडीज नहीं होते जिनका पता एचआईवी जांच से चल सके। किंतु ऐसे व्यक्ति के रक्त, वीर्य, योनि तरलों, स्तन के दूध जैसे शारीरिक तरलों में उच्च मात्रा में पहले से ही एचआईवी मौजूद हो सकता है। विंडो अवधि के दौरान एचआईवी जांच से एचआईवी संक्रमण होने का पता न चलने पर भी संक्रमित व्यक्ति दूसरे व्यक्ति को संक्रमित कर सकता है।
29) एचआईवी जांच के क्या लाभ हैं?
एचआईवी जांच कराने के लाभ इस प्रकार हैं:
- एचआईवी पाजिटिव पाये जाने पर व्यक्ति अपना उपचार समय पर शुरू करा सकता है और अनेक वर्षों तक सामान्य और स्वस्थ जीवन जी सकता है।
- एचआईवी पाजिटिव होने का पता लगाने पर व्यक्ति दूसरों को विषाणु संचरित करने से बचने के लिए सावधनियां बरत सकता है।
- एचआईवी पाजिटिव मां से उसके बच्चे को संचरण की रोकथाम के लिए कदम उठाये जा सकते हैं।
- जिस व्यक्ति को एचआईवी न हो, वह एचआईवी की रोकथाम के तरीकों के बारे में दूसरों को परामर्श और जानकारी दे सकता है।
एचआईवी पाजिटिव होने का पता लगने पर व्यक्ति को अक्सर काफी सदमा पहुंचता है। अत: लोगों को यह आश्वासन देने में िकवे उपयुक्त उपचार और देखरेख के साथ सामान्य और स्वस्थ जीवन जी सकते हैं, जांच से पहले और जांच के बाद के परामर्श की महत्वपूर्ण भूमिका होती है।
30) विभिन्न एचआईवी जांचें क्या-क्या हैं?
तीन एचआईवी जांचों का सर्वाधिक सामान्य रूप से उपयोग किया जाता है। ये एंटीबाडीज के मापन पर आधारित हैं।
स्पॉट जांच - यह सर्वाधिक सामान्य तौर पर की जाने वाली जांच हैं। पाजिटिव जांच का अर्थ है व्यक्ति को एचआईवी संक्रमण होने की संभावना है। एचआईवी के लिए यह पुष्टिकारी जांच नहीं है।
एलाइसा जांच -यह कम खर्चीली और असरकारी एचआईवी जांच है। यदि व्यक्ति एक के बाद एक दो एलाइसा जांचों में पाजिटिव पाया जाए तो इसे पाजिटिव होने की पुष्टि माना जाता है।
वेस्टर्न ब्लॉट जांच - इसे एचआईवी एंटीबाडीज की जांच के लिए स्वर्णमान (गोल्ड स्टैंडर्ड) यानी सर्वोत्ताम जांच माना जाता है। वेस्टर्न ब्लॉट द्वारा पुष्टि एलाइसा की तीसरी पाजिटिव जांच के बराबर है।
31) मैं अपनी जांच कहां करा सकता हूं?
आप कई स्थानों से अपनी एचआईवी जांच करा सकते हैं: स्थानीय नैदानिक प्रयोगशाला, सरकारी अस्पताल, परिवार नियोजन क्लीनिक, वीसीसीटीसी केंद्र, जो विशेषकर एचआईवी जांच के लिए स्थापित किये गये हैं। हमेशा ऐसी जगह से जांच कराने का प्रयास करें जहां एचआईवी/एड्स के बारे में परामर्श भी दिया जाता हो।
32) क्या मेरे जांच परिणाम गोपनीय हैं?
एचआईवी जांच कराने वाले सभी लोगों को जांच से पूर्व अपनी जानकारीयुक्त सहमति देनी होती है। जांच के परिणामों को पूरी तरह से गोपनीय रखा जाना चाहिए।
इस दृष्टि से उपलब्ध जांचों इस प्रकार हैं:
गोपनीय एचआईवी जांच :एचआईवी की जांच करने वाले सभी चिकित्साकर्मी जांच के परिणामों को चिकित्सा रिकार्डों तक ही सीमित करके गोपनीय रखते हैं। परिणाम दूसरे लोगों को तब तक नहीं बताये जाते जब तक कि वे उस व्यक्ति से लिखित अनुमति नहीं लेते जिसकी जांच की गई है।
अज्ञात एचआईवी जांच :जिस व्यक्ति की जांच की जाती है जांच के विवरणों के साथ उसके नाम का उपयोग नहीं किया जाता। व्यक्ति के नाम की जगह कोड संख्या का उपयोग किया जाता है, जिसका उपयोग कर व्यक्ति अपनी जांच के परिणाम प्राप्त कर सकता है। व्यक्ति को जांच से जोड़ने वाले कोई रिकार्ड नहीं रखे जाते।
साझी गोपनीयता को प्रोत्साहन दिया जाता है। इसका अर्थ यह है कि व्यक्ति जांच को परिवार के सदस्यों, प्रिय जनों, देखरेखकर्ताओं और भरोसेमंद मित्रों को हिस्सेदार बनाते हुए जांच गोपनीय रखे। किंतु जांच के परिणाम बताते समय ध्यान रखना चाहिए क्योंकि इससे स्वास्थ्य देखरेख और पेशेवर एवं सामाजिक परिवेश में भेदभाव हो सकता है। इसलिए साझी गोपनीयता उस व्यक्ति के विवेकाधिकार पर निर्भर होनी चाहिए जिसकी जांच की जानी है। हालांकि एचआईवी जांच के परिणामों को गोपनीय रखना चाहिए, पर परमर्शदाताओं, स्वास्थ्य कर्मी और सामाजिक कार्यकताओं को व्यक्ति के एचआईवी पाजिटिव होने की जानकारी पाना जरूरी हो सकता है ताकि वे उचित देखरेख प्रदान कर सकें।
33) यदि मुझे एचआईवी है तो मैं क्या करूं?
नए उपचारों के फलस्वरूप अब एचआईवी क साथ जीने वाले कई लोग अधिक लंबा और अधिक स्वस्थ जीवन जी रहे हैं। यह सुनिश्चित करना बहुत महत्वूपर्ण है कि आप ऐसे डाक्टर से इलाज करायें जो एचआईवी का उपचार करना जानता हो। कोई स्वास्थ्य देखरेख कर्मी या प्रशिक्षित एचआईवी परामर्शदाता परामर्श देकर आपको उपयुक्त डाक्टर ढूंढने में मदद कर सकता है।
इसके अलावा, स्वस्थ रहने के लिए आपको निम्न बातों का ध्यान रखना होगा।
- डॉक्टर के निर्देशों का पालन करें। इलाज के लिए समय पर डॉक्टर के पास जाएं। यदि आपका डॉक्टर आपको दवाएं लेने के लिए कहता है तो उसके निर्देश के अनुसार दवाएं लें।
- नियोनिया और फ्लू जैसे संक्रमणों से बच्चे के लिए (अपने चिकित्सक की सलाह लेने के बाद) टीके लगवाएं।
- धूम्रपान छोड़ दें या ऐसी दवाएं न लें जो आपके डॉक्टर ने न बताई हो।
- स्वास्थ्यवर्धक आहार लें।
- मजबूत और स्वस्थ रहने के लिए नियमित रूप से व्यायाम करें।
- पर्याप्त निद्रा और विश्राम लें।
34) क्या एचआईवी/एड्स का कोई इलाज है?
नहीं, एचआईवी/एड्स का कोई इलाज नहीं है। रोग की प्रगति को धीमा तो किया जा सकता है, पर पूरी तरह से रोका नहीं जा सकता। एंटीरेट्रोवायरल दवाओं के सही मिश्रण से एचआई से रोग प्रतिरक्षा प्रणाली को होने वाली क्षति को मंद किया जा सकता है और एड्स की शुरूआत में विलंब किया जा सकता है।
35) किस प्रकार की देखरेख और उपचार उपलब्ध है?
देखरेख और उपचार के अंतर्गत कई बातें शामिल हैं जैसे स्वैच्छिक परामर्श और जांच (वीसीटी), एचआईवी के और आगे संचरण की रोकथाम में सहायता, अनुवर्ती (फौलो अप) परामर्श, भोजन और पोषण के संबंध में परामर्श, एसटीआईज का उपचार, पोषण संबंधी प्रभावों का प्रबंधन अवसरवादी संक्रमणों की रोकथाम और उपचार और एंटीरेट्रोवायरल दवाओं की व्यवस्था।
36) एंटीरेट्रोवायरल दवाएं क्या हैं?
एंटीरेट्रोवायरल दवाओं का उपयोग एचआईवी संक्रमण के उपचार के लिए किया जाता है। ये शरीर में एचआईवी के पुनर्जनन को धीमा करके स्वयं एचआईवी संक्रमण के खिलाफ काम करती हैं।
37) एंटीरेट्रोवायरल दवाएं कैसे काम करती है?
एचआईवी संक्रमित कोषिका के भीतर अपनी प्रतियां बनाता है जो शरीर के भीतर की अन्य स्वस्थ कोषिकाओं के संक्रमित करते जाता है। एचआईवी जितनी अधिक कोषिकाओं को संक्रमित करता है, उतना ही रोग प्रतिरक्षा प्रणाली पर इसका असर पड़ता है। एंटीरेट्रोवायरल दवाएं प्रतिकृतिकरण (रिप्लिकेशन) की इस प्रक्रिया को धीमा करती हैं और इस प्रकार विभिन्न तरीकों से प्रतिकृतिकरण प्रक्रिया में हस्तक्षेप करके शरीर के भीतर विषाणु के फैलाव को कम करती हैं।
न्यूक्लेओसाइड विपरीत प्रतिलिपिकारक निरोधक (न्यूक्लेओसाइड रिवर्स ट्रांस्क्रिप्टेस इनहिबिटर्स) :एचआईवी को अपनी प्रतियां बनाने के लिए विपरीत प्रतिलिपिकारक (रिवर्स ट्रांस्क्रिप्टेस) नामक एक एंजाइम की जरूरत होती है। ये दवाएं विषाणु की जेनेटिक सामग्री की प्रतिलिपि बनाने वाली प्रक्रिया को रोक कर विपरीत प्रतिलिपिकारक को अवरोधित कर देती हैं।
गैर-न्यूक्लेओसाइड विपरीत प्रतिलिपिकारक निरोधक:ये दवाएं स्वयं विपरीत प्रतिलिपिकारक एंजाइम से अपने को बांध कर एचआईवी के प्रतिकृतिकरण (रिप्लिकेशन) में हस्तक्षेप करती हैं। इसमें एंजाइम अपना काम नहीं कर पाता और संक्रमित कोषिकाओं में नए विषाणु-कणों का उत्पादन रूक जाता है।
प्रोटीस निरोधक:प्रोटीस एक पाचक एंजाइम है जिसकी नये विषाणु-कण पैदा करने के लिए एचआईवी के प्रतिकृतिकरण में जरूरत होती है। यह संक्रमित कोषिकाओं में प्रोटीनों और एंजाइमों को तोड़ देता है और फिर अन्य कोषिकाओं को संक्रमित करता रह सकता है। प्रोटीस निरोधक प्रोटीनों और एंजाइमों के टूटने की इस प्रक्रिया को रोक देते हैं और इस तरह नये विषाणु कणों के उत्पादन को धीमा करते हैं।
इस समय ऐसी दूसरी दवाओं का परीक्षण किया जा रहा है जो विषाणु चक्र की अन्य अवस्थाओं (जैसे कि विषाणु का प्रवेश और असंक्रमित कोषिका में उसका विलय) को अवरोधित कर सकती है।
38) क्या एंटीरेट्रोवायरल दवाएं असरकारक हैं?
तीन या चार दवाओं को मिश्रित करके एचआईवी का उपयोग करने पर एड्स-संबंधी बीमारी और मृत्यु में काफी अधिक कमी देखी गई है। हालांकि मिश्रित एआवी चिकित्सा एड्स का इलाज तो नहीं है, पर वाइरेमिया (रक्त में एचआईवी की मात्रा) में कमी लाकर और सीडी 4+ कोषिकाओं (श्वेत रक्त कोषिकाओं जो रोग प्रतिरक्षा प्रणाली के प्रभावी कार्य के लिए महत्वपूर्ण हैं) की संख्या को बढ़ा कर इसने एचआईवी-पाजिटिव लोगों को अधिक लंबे समय तक, अधिक स्वस्थ और अधिक उत्पादक जीवन जीने में सक्षम बनाया है।
एंटीरेट्रोवायरल उपचार लंबे समय तक असरकारी हो, इसके लिए विभिन्न एंटीरेट्रोवायरल दवाओं को मिश्रित करने की जरूरत होती है। इसी को ''अत्यंत सक्रिय एंटीरेट्रोवायरल चिकित्सा'' - इन शब्दों का उपयोग तीन या उससे अधिक एचआईवी-रोधी दवाओं के मिश्रण के लिए किया जाता है।
ऐसा पाया गया है कि कोई एक दवा लेने पर कुछ समय बाद विषाणु में आये बदलाव उसे दवा-रोधी बना देते हैं। इस कारण दवा असरकारक नहीं रह जाती और विषाणु पहले की ही तरह पुनरुत्पादन करना शरू कर देता है। अगर दो या उससे अधिक दवाएं एक साथ ली जाएं तो, प्रतिरोध की दर को काफी कम किया जा सकता है। सामान्यत: इस मिश्रण में दो दवाएं विपरीत प्रतिलिपिकारक एंजाइम को रोकने वाली होती हैं और एक दवा प्रोटीस निरोधक होती है।
एंटीरेट्रोवायरल दवाओं को हमेशा चिकित्सा की देखरेख में लिया जाना चाहिए।
39) एआरवी उपचार की वर्तमान स्थिति क्या है?
विकासशील देशों में केवल 15 प्रतिशत जरूरतमंद लोग ही एंटीरेट्रोवायरल दवाएं प्राप्त कर पाते हैं, जबकि उच्च आय वाले देशों में यह लगभग सभी जरूरतमंद लोगों को यह सुलभ है। हाल-हाल तक इन दवाओं की ऊंची कीमतों, अपर्याप्त स्वास्थ्य अवसंरचना और वित्तीय साधनों के अभाव की वजह से निम्न और मध्यम आय वाले देशों में मिश्रित एआरवी उपचार व्यापक रूप से उपलब्ध नहीं हो पाता था। किंतु हाल के वर्षों में एचआईवी के साथ जीने वाले लोगों, नागरिक समाज और अन्य संबंधित साझेदारों द्वारा उत्प्रेरित की गई बढ़ी हुई राजनीतिक और वित्तीय प्रतिबध्दता के चलते एचआईवी चिकित्सा तक लोगों की पहुंच का काफी विस्तार हुआ है।
वर्ष 2002 में विश्व स्वास्थ्य संगठन की आवश्यक दवा सूची में 12 एआरवी दवाओं को शामिल किया गया है। सूची में इन दवाओं को विकसित देशों में एआरवी की प्रभावोत्पादकता के साक्ष्य का सावधानीपूर्वक विश्लेषण के बाद जोड़ा गया।
40) जब एआरवी दवाएं सुलभ न हो तो किस प्रकार की देखरेख उपलब्ध है?
जब एआरवी दवाएं उपलब्ध न हों तो देखरेख के अन्य तत्व जीवन की उच्च गुणवत्ताको बनाये रखने में मदद कर सकते हैं। इनमें पर्याप्त पोषण, परामर्श, अवसरवादी संक्रमणों की रोकथाम और उपचार तथा सामान्यत: स्वस्थ रहना, आदि शामिल हैं।
41) पीईपी क्या है?
विषाणु के संपर्क में अपने के बाद रोकथामकारी उपचार (पीईपी) के अंतर्गत दवा लेना, प्रयोगशाला जांच और परामर्श शामिल हैं। एचआईवी के संभावित संपर्क में अपने के कुछ ही घंटों के भीतर पीईपी उपचार आरंभ कर देना चाहिए और इसे लगभग चार सप्ताह तक जारी रखना चाहिए। यह सिध्द नहीं हुआ है कि पीईपी उपचार एचआईवी संचरण की रोकथाम करता है। किन्तु शोध अध्ययन यही सुझाते हैं कि अगर दवा संभावित एचआईवी संपर्क के शीघ्र बाद (20 घंटे के भीतर और 72 घंटे से पहले) शुरू कर दी जाए तो एचआईवी संचरण की रोकथाम में यह लाभकारी हो सकती है।
42) जब आप एंटीरेट्रोवायरल चिकित्सा ले रहे हों क्या तब भी आप दूसरों को विषाणु संचरित कर सकते हैं?
एंटीरेट्रोवायरल चिकित्सा संक्रमित व्यक्ति को दूसरों को विषाणु संचरित करने से नहीं रोकती। यह चिकित्सा विषाणु भार को इतने निम्न स्तर पर ले आती है कि इसका पता लगाना कठिन होता है पर एचआईवी शरीर में तब भी मौजूद रहता है और यौन संपर्क, सुइयों के साझे उपयोग के माध्यम से या स्तनपान कराने वाली माताओं से उनके शिशुओं को संचरित हो सकता है।
43) महिलाएं एचआईवी से पुरुषों से अधिक असुरक्षित क्यों हैं?
'दोहरी' असुरक्षा के कारण महिलाओं की एचआईवी से असुरक्षा बढ़ जाती है। पहले तो यह कि जीववैज्ञानिक दृष्टि से महिलाएं एचआईवी से पुरुषों से अधिक असुरक्षित होती है। योनि का सतह क्षेत्र लिंग के मुंह की सतह से अधिक होता है।
दूसरे, महिलाओं का सामाजिक सीमांतीकरण उन्हें अधिक असुरक्षित बना देता है। निम्न साक्षरता और साथ ही पुरुषों पर आर्थ्ािक और सामाजिक निर्भरता महिलाओं को संक्रमा के बारे में जानने के कम अवसर देती है। जिसका अर्थ है सेवाओं तक उनकी पहुंच कम होती है। यौन शोषण, बलात्कार, घरेलू हिंसा और यौनकार्य जैसी अन्य स्थितियां भी उन्हें पुरुषों की तुलना में अधिक असुरक्षित बना देती हैं।
44) क्या एचआईवी के साथ जीने वाले लोगों के विशेष अधिकार या उत्तारदायित्व होते हैं?
क्योंकि हर कोई बिना भेदभाव के बुनियादी मानव अधिकारों का हकदार हैं, इसलिए एचआईवी के साथ जीने वाले लोगों के अधिकार - शिक्षा, रोजगार, स्वास्थ्य, भ्रमण, विवाह, निजता, सामाजिक सुरक्षा आदि के अधिकार - वहीं हैं जो उन लोगों के जिन्हें एचआईवी संक्रमण नहीं हैं।
एचआईवी संक्रमण को रोकना असंक्रमित और संक्रमित लोगों, दोनों की जिम्मेदारी है। लेकिन कई लोग - जिनमें महिलाएं, बच्चे, किशोर-किशोरियों और युवा लोग शामिल है - समाज में अपनी निम्न स्थिति या व्याक्तिगत शक्तिहीनता के कारण सुरक्षित यौन संपर्क के लिए दबाव नहीं डाल पाते। इसलिए, जो लोग यह जानते हैं कि वे संक्रमित हैं, उन पर दूसरों को संचरण से बचाने की जिम्मेदारी है।
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