''एड्स के विरुद्ध जवाबी कार्रवाई में राजनीतिक नेतृत्व का महत्व'' विषय पर बिहार एचआईवी/एड्स विधायक फोरम की स्थापना के आपसेर पर दिया गया मुख्य अभिभाषण
बिहार के माननीय मुख्यमंत्री, श्री नीतिश कुमार जी,
बिहार विधान सभा के माननीय अध्यक्ष, श्री उदय नारायण चौधरी जी,
बिहार विधान परिषद के सभापति, प्रो. अरुण कुमार जी,
माननीय मंत्रीगण,
माननीय सांसदगण,
बिहार विधान मंडल के माननीय सदस्यगण,
राज्य के लब्धप्रतिष्ठ सिविल सेवा अधिकारीगण,
संचार माध्यमों से सदस्यगण,
राष्ट्रसंघ और नेको में मेरे सहकर्मियों,
देवियों और सज्जनों!
इस भव्य समारोह में - जो बिहार में एड्स की महामारी की दृष्टि से एक ऐतिहासिक अवसर का द्योतक है - राष्ट्रसंघ का प्रतिनिधित्व करते हुए मुझे अपार हर्ष का अनुभव हो रहा है।
मैं राष्ट्रसंघ के महासचिव, कोफी अन्नान, महा अवर सचिव और यूएनएड्स के कार्यकारी निदेशक, डॉ. पीटर पॉयोट और भारत में मौजूद राष्ट्र संघ की समूची बिरादरी की ओर से आपके लिए शुभकामनाएं लेकर आया हूं।
एड्स पर नियंत्रण सहस्राब्दी विकास लक्ष्यों में से एक है जिसे राष्ट्र संघ सभी सदस्य - देशों ने एचआईवी का मुकाबला किया जाना है। ये सभी लक्ष्य आपस में जुड़े हुए हैं और एक लक्ष्य की प्राप्ति का अर्थ है दूसरे लक्ष्य की दिशा में प्रगति।
मैं बिहार के नेतृत्व को एचआईवी/एड्स पर बिहार राज्य विधायक फोरम का शुभारंभ करने हेतु बधाई देना चाहूंगा। इस बैठक के आयोजन के लिए इससे अधिक उपयुक्त समय और क्या हो सकता था जब एचआईवी की महामारी देश के इस हिस्से में खतरनाक आयाम धारण करने का जोखिम पैदा कर रही है। नैको के मेरे सहकर्मी राज्य में इस महामारी की विस्तृत जानकारी प्रस्तुत करने जा रहे हैं।
मुझे इस महामारी की भूमंडलीय स्थिति के बारे में बोलने को कहा गया है। यह कार्य मैं अगले कुछ मिनटों में करुंगा, पर पहले आप सभी को यह याद दिला दूं कि एड्स ह्यूमन इम्यूनोडिफिशंसी वाइरस (एचआईवी) नामक एक विषाणु से होता है जो रोगों से लड़ने की मानव शरीर की शक्ति को समाप्त कर देता है। उपचार के बिना, एड्स एक घातक रोग होता है। मुझे इन बातों को जिन्हें यहां उपस्थित अधिकता लोग भली भांती जानते हैं - दोहराने के लिए माफ करें। एड्स केवल मानव से मानव में संचरित होता है; और इसके संचरण की तीन पध्दतियां हैं:
• यौन संपर्क से - चाहे वह समलैंगिक हो या स्त्री-पुरुष के बीच हो।
• रक्त के माध्यम से - विशेष कर संदूषित रक्त चढ़ाने से, पर साथ ही नशीली दवा का इंजेक्शन लेने वालों द्वारा एक दूसरे की सुइयों का प्रयोग करने या अस्पतालों में गलती से असुरक्षित इंजेक्शन लगने से।
• गर्भधारण और प्रसव के दौरान एचआईवी संक्रमित मां से बच्चे को।
इनके अलावा एचआईवी संचरण की और कोई पध्दति नहीं है।
एड्स की भूमंडलीय स्थिति की तस्वीर प्रस्तुत करने से पहले, मैं दृढ़ता के सथ यह कहना चाहूंगा कि एचआइवी संचरण की जो तीनों पध्दतियां मैंने बताई हें। उनकी रोकथाम की जा सकती है। यौन संपर्क द्वारा संचरण की कण्डोम का उपयोग करके; रक्त ध्दारा संचरण की रक्त की जांच करके; और मां से बच्चे को संचरण की एंटीरेट्रोवाइरल उपचार ध्दारा रोकथाम की जा सकती है।
तो जहां एड्स एक ओर विनाशकारी रोग है, वहीं दूसरी ओर इसकी पूरी तरह से रोकथाम की जा सकती है।
दुनिया में एड्स के पहले मामले आज से 25 साल पहले होती और अमरीका के पश्चिमी समुद्रतटीय क्षेत्र में सामने आए थे। भारत में एड्स का पहला मामला चैन्नई में 1986 में सामने आया था। इन पच्चीस वर्षों में यह वाइरस विश्व भर में 2 करोड़ लोगों को मौत का शिकार बना चुका है। यह युवा लोगों की मृत्यु का एक अत्यंत महत्वपूर्ण कारण बन गया है और इसका अनेक देशों पर काफी प्रभाव पड़ा है। आज अफ्रीका के दक्षिण पूर्व के सभी देशों में वयस्क आबादी में एचआईवी की व्याप्ति दर 15 प्रतिशत से अधिक है (बोत्सवाना में तो यह 34 प्रतिशत है)।
अनुमानत: विश्व भर में 4 करोड़ लोग इस विषाणु के साथ जी रहे हैं। वर्ष 2005 में 40 लाख लोग इस वाइरस से संक्रमित हुए थे और 28 लाख लोगों की एड्स से मृत्यु हो गई थी। क्योंकि नए संक्रमणों की संख्या मृत्युओं की संख्या से अधिक है, इसलिए यह स्पष्ट हो जाता है कि विश्व में एचआईवी बढ़ रहा है।
एचआईवी के साथ जीने वाले 63 प्रतिशत लोग अफ्रीका में और 20 प्रतिशत एशिया में रहते हैं। भारत में जहां एचआईवी से संक्रमित 50 लाख से अधिक लोग रहते हैं - एशिया के 75 प्रतिशत और विश्व के 15 प्रतिशत एचआईवी संक्रमित लोग रहते हैं।
वर्ष 2005 के दौरान विश्व में प्रतिदिन होने वाले 11,000 एचआईवी संक्रमणों का विभाजन किया जाए तो स्थिति इस प्रकार है:
- 95 प्रतिशत से अधिक संक्रमण निम्न और मध्यम आय वाले देशों में हुए।
- लगभग 2000 से अधिक 15 वर्ष तक के बच्चों को एचआईवी संक्रमण हुआ।
- संक्रमित लोगों में से 8,800 लोग 15-49 वर्ष के हैं, जिनमें से
लगभग 50 प्रतिशत महिलाएं थीं
लगभग 50 प्रतिशत 15-24 वर्ष के थे।
1990 के दशक के माध्यम में एड्स का उपचार उपलब्ध हुआ और अनेक नई दवाएं जैसे कि एंटी-रंट्रोवाइरल्स खोजी गईं! यह उपचार रोगियों के जीवन को सामान्य बनाता है, और उनकी रोग-प्रतिरक्षा प्रणाली को ताकत देता है, पर यह कोई इलाज नहीं है। अगर उपचार को रोक दिया जाए तो रोग फिर से हो जाता है और अक्सर विषाणु रोग-प्रतिरोधी बन जाता है। अत: एंटी-रेट्रोवाइरल उपचार जीवन प्रदान करता है और दवा लेने के नियमों का कड़ाई से पालन करना होता है।
आज के अनुमानों के अनुसार 15 लाख रोगी विश्व भर में एंटी-रेट्रोवाइरल दवाएं ले रहे हैं। पर जितने लोगों को इन दवाओं की जरूरत है, उसका ये 40 प्रतिशत से भी कम है। भारत की दवा कंपनियों को यह श्रेय जाता है कि एंटी-रेट्रोवाइरल्स की कीमतें पिछले 6 वर्षों में काफी कम हो ई हैं, पर इस विषाणु की रोग-प्रतिरोधी नस्ल के सामने आने पर अधिक महंगी दवाओं की यानी दूसरी पंक्ति के एआरवी की जरूरत है।
अंतर्राष्ट्रीय समुदाय में एड्स के विरुद्ध मजबूत लामबंदी देखने में आई है। वर्ष 2000 में एड्स नियंत्रण के लिए लगभग 60 करोड़ अमरीकी डॉलर की राशि आवंटित की गई। वर्ष 2005 में यह राशि बढ़ा कर 8 अरब अमरीकी डॉलर कर दी गई और राष्ट्र संघ महासभा के विशेष एड्स सत्र में यह प्रस्ताव पारित किया गया कि एड्स से लड़ने और उस पर जीत हासिल करने के लिए 20 अरब अमरीकी डॉलर आवंटित किए जाएंगे।
एड्स पर जीत संभव है। कई देश मजबूत नेतृत्व और ठोस रोकथाम कार्यक्रमों के द्वारा इस महामारी के इन देशों में युगांडा, बारबाडोस, कंबोडिया और थाईलैंड शामिल हैं। नेको के मेरे सहकर्मी आपको तमिलनाडु और महाराष्ट्र में हासिल की गई जीतों के बारे में बताएंगे।
पर जीत उन्हीं देशों और राज्यों में हासिल की गई है जहां राजनीतिक नेतृत्व पूरी तरह इस कार्य में लगा रहा और एड्स नियंत्रण को प्राथमिकता का मुद्दा बनाया गया। जिन देशों ने इस रोग की उपेक्षा की, वहां यह रोग फैलता रहा। कोफी अन्नान के शब्दों में कहें तो, ''उपेक्षा और निष्क्रियता की कीमत पूर्ण आर्थिक तबाही से लेकर सभ्यताओं के विनाश तक कुछ भी हो सकती है।''
भारत में निर्वाचित प्रतिनिधियों ने इस नेतृत्व के महत्व को समझा है और उनकी यूएनएड्स को पहलकदमियों में सहायता प्रदान करने का सौभाग्य प्राप्त हुआ है। एचआईवी/एड्स सांसद फोरम में सभी राजनीतिक दलों के 250 सांसद शामिल हैं, और यूएनएड्स की सहायता से एचआईवी/एड्स पर 8 विधायक फोरम गठित किये गऐ हैं।
इस फोरम के सदस्य विधायक राज्य में एड्स आंदोलन की आवाज को मुखर बनाने के साथ-साथ और क्या भूमिका निभा सकते हैं?
• प्रभावशाली पुरुषों और महिलाओं के रूप: लोगों को ज्ञान और जानकारी देना। एड्स अज्ञान और डर के आधार पर पनपता है और इन दोनों का मुकाबला कर सकते हैं।
• कानून निर्माताओं के रूप : सभी को जानकारी, रोकथाम, उपचार और सेवाएं उपलब्ध कराने की गारंटी करने और साम्यता, गोपनीयता और गरिमा की हिफाजत करने के लिए कानून बना कर उन्हें पारित करना
• सरकार और लोगों के बीच की कड़ी के रूप : समुदायों, मत-निर्माताओं और पंचायतों को एड्स संबंधी जागरुकता पैदा करने के कार्य में संलग्न करना।
• चुनाव क्षेत्र के संरक्षकों के रूप: समुदाय के स्तर पर स्थानीय जवाबी कार्रवाई को मजबूत बनाने के लिए योजनाएं, बजट और निगरानी कार्यविधियां बनाना।
• जनता के पक्षधरों के रूप : लांछना और भेदभाव से लड़ना - सभी के लिए मानव-अधिकार सुनिश्चित करना।
एड्स के विरुद्ध लड़ाई में जीत हर राज्य और हर जिले में हासिल की जाएगी केंद्रीय स्तर पर नहीं। अगस्त में प्रधानमंत्री हर जिले में एड्स के विरुद्ध जवाबी कार्रवाई को बल प्रदान करने के उद्देश्य से सभी जिला परिषद अध्यक्षों और मेयरों की एक बैठक की अध्यक्षता करेंगे। आज इस फोरम की स्थापना करके आपने एक ऐसी महत्वपूर्ण कड़ी का निर्माण किया है जो एड्स के विरुद्ध बिहार की जीत की कुंजी बनेगी।
इस लक्ष्य की प्राप्ति में यूएनएड्स की सहायता के प्रति आश्वस्त रहें।

|