वैश्विक एड्स महामारी बराबर बढ़ती हुई
नए आंकड़ें भी यह दर्शाते हैं कि यदि एचआईवी निवारण कार्यक्रम जोखिम की सर्वाधिक संभावना वाले व्यक्तियों की ओर केन्द्रित किए जाएं या पहुंचाए जाएं और बदलती हुई राष्ट्रीय महामारियों के प्रति अनुकूलित किए जाएं तो उनके बेहतर परिणाम देखने में आते हैं।
आज की तारीख में दो स्थितियों, जिनके बारे में मैं आपसेे चर्चा करने जा रहा हूं से संबंधित अनुभवों को लेकर एचआईवी/एड्स संबंधी विचारों में हम सभी के लिए इस आशय के महत्वपूर्ण संदेश निहित हैं कि एचआईवी प्रभावित व्यक्ति वास्तविक जीवन में जिन समस्याओं को झेल रहे हैं उस तरह की समस्याओं के साथ कैसे निपटा जाए। मैं आपके साथ ‘एचआईवी मुक्त भारत: एक मिशन’ विषय पर बातचीत करना चाहूंगा।
जेनेवा, 21 नवम्बर, 2006-वैश्विक एड्स महामारी बराबर बढ़ रही है और इस आशय का चिन्ताजनक साक्ष्य उभर रहा है कि कुछ देशों में नई एचआईवी संक्रमण दरों में जो पूर्व में स्थिर अथवा ह्रासशील थी उछाल देखने में आया है। फिर भी कुछ देशों में संक्रमण दरों में गिरावट के साथ-साथ युवा वर्ग के यौन व्यवहार में कुछ सकारात्मक प्रवृत्तियां भी देखने में आई हैं।
यूएनएड्स/डब्ल्यूएचओ 2006 एड्स एपिडेमिक अपडेट में आज की तारीख में प्रकाशित नवीनतम आंकड़ों के अनुसार अनुमानत: 39.5 मिलियन व्यक्ति एचआईवी से पीड़ित हैं। 2006 में 4.3 मिलियन नए संक्रमण पाए गए जिनमें से 2.8 मिलियन (65%) उप-सहारा अफ्रीका में तथा पूर्व यूरोपप और केन्द्रीय एशिया में, जहां इस आशय के संकेत हैं कि संक्रमण दरों में 2004 के बाद से 50% से अधिक की वृध्दि हुई है उल्लेखनीय वृध्दि देखने में आई है। 2006 में 2.9 मिलियन व्यक्ति एड्स संबंधी रोगों के कारण मृत्यु को प्राप्त हुए।
नए आंकड़ें यह दर्शाते हैं कि जहां एचआईवी निवारण कार्यक्रम जारी नहीं रखे जा सके हैं तथा/अथवा बढ़ती हुई महामारियों के अनुसार अनुकूलित नहीं किए गए हैं वहां कुछ देशों में संक्रमण दरें या तो स्थिर बनी हुई हैं अथवा बढ़ रही हैं।
उत्तरी अमरीका और पश्चिमी यूरोप एचआईवी निवारण कार्यक्रम प्राय: जारी नहीं रखे जा सके हैं और नए संक्रमणों की संख्या पूर्ववत बनी हुई है। इसी प्रकार निम्न और मधयम आय वाले देशों में ऐसे देशों के उदाहरण गिने चुने हैं जो वस्तुत: नए संक्रमणों की संख्या में कमी ला सके हैं और कुछ ऐसे देश हैं जिन्होंने पूर्व में नए संक्रमणों की संख्या में कमी लाने में सफलता का परिचय दिया था जैसे कि यूगांडा जहां अब या तो गति धीमी हो गई है अथवा संक्रमण दरों में वृध्दि देखी जा रही है।
यूएनएड्स कार्यकारी निदेशक डॉ. पीटर पायट ने कहा कि 'यह एक चिन्ता का कारण है क्योंकि हम यह जानते हैं कि इन देशों में एचआईवी निवारण कार्यक्रमों ने पूर्व में प्रगति का परिचय दिया था--यूगांडा एक उज्ज्वल उदाहरण्ा कहा जा सकता है। इसका मतलब यह हुआ कि देश उस गति से आगे नहीं बढ़ रहे हैं जिस गति से उनकी महामारियां आगे बढ़ रही हैं। जहां हमें अपने एचआईवी उपचार कार्यक्रम का विस्तार करते रहना चाहिए वहां जीवनरक्षक निवारक प्रयासों में भी अत्यधिक तेजी लाए जाने की जरूरत है।'
एचआईवी निवारण सफल होता है किन्तु उससे केन्द्रित और बनाए रखना जरूरी है
रिपोर्ट के नवीन आंकड़े यह दर्शाते हैं कि ऐसे संवर्ध्दित एचआईवी निवारण कार्यक्रम, जो केन्द्रित हैं और ऐसे लोगों तक पहुंचने के लिए अनुकूलित हैं जिन्हें एचआईवी संक्रमण के जोखिम की संभावना सर्वाधिक है, सफल हो रहे हैं। पिछले दशक में कई देशों में सामान्यीकृत महामारियों सहित युवा लोगों के यौन व्यवहार में सकारात्मक प्रवृत्तियां देखने में आई हैं जैसे कि कण्डोमों का पहले से अधिक प्रयोग, यौन व्यवहार की शुरूआत में देरी और यौन साथियों की न्यून संख्या। बोत्सवाना, बुरुण्डी, कोटा दी ईवोयर, केन्या, मलावा, रवांडा, तन्जानिया और जिम्बाबवे में 2000 तथा 2005 के बीच युवा लोगों के बीच एचआईवी की व्याप्ति में गिरावट देखने में आई है।
अन्य देशों में भी जहां निवेश उन व्यक्तियों की जरूरतों की ओर केन्द्रित किए जाते हैं जिन्हें एचआईवी के जोखिम की सबसे अधिक संभावना है वहां सीमित संसाधनों से भी भारी लाभ प्राप्त हो रहे हैं। चीन में सेक्स वर्करों के लिए केन्द्रित कार्यक्रमों के कुछ उदाहरण हैं जिनमें कण्डोम के प्रयोग में उल्लेखनीय वृध्दि तथा यौन संचरित संक्रमणों में गिरावट देखने में आई है और कुछ क्षेत्रों में इंजेक्शनों के जरिए नशीली दवाओं का सेवन करने वालों के साथ जुड़े कार्यक्रम भी प्रगति का परिचय दे रहे हैं। पुर्तगाल में एचआईवी तथा नशीली दवाओं के प्रयोग पर केन्द्रित विशेष निवारण कार्यक्रम कार्यान्वित किए जाने से इंजेक्शन के जरिए नशीली दवाओं का प्रयोग करने वालों के बीच एचआईवी निदान 2001 की तुलना में 2005 में लगभग एक तिहाई (31%) कम पाया गया।
चुनौतियों की ओर ध्यान देना: अपनी महामारी को पहचाने
अनेक देशों में एचआईवी निवारण कार्यक्रम उन लोगों तक नहीं पहुंच पा रहे हैं जिन्हें संक्रमण होने का जोखिम सबसे अधिक रहता है जैसेकि युवा वर्ग, महिलाएं और लड़कियां, पुरुषों के साथ यौन संबंध रखने वाले पुरुष, सेक्स वर्कर तथा उनके ग्राहक, इंजेक्शन के जरिए नशीली दवाएं लेने वाले लोग तथा नृजातीय और सांस्कृतिक अल्पसंख्यक। इस रिपोर्ट में इस आशय की रूपरेखा प्रस्तुत की गई है कि एड्स महामारी के भीतर महिलाओं और लड़कियों के मुद्दे को किस प्रकार जारी रखा जाना चाहिए और अपेक्षतया अधिक ध्यान दिया जाना चाहिए। उदाहरण के लिए उप-सहारा अफ्रीका में पुरुषों की तुलना में महिलाओं की अधिक संख्या में एचआईवी से संक्रमित होने की संभावना बनी रहती है तथा इस क्षेत्र के अधिकांश देशों में एचआईवी से संक्रमित व्यक्तियों की देखभाल करने वालों में भी महिलाओं की संख्या ही अधिक होने की संभावना रहती है।
रिपोर्ट के अनुसार कम्बोडिया, चीन, भारतवर्ष, नेपाल, पाकिस्तान, थाइलैण्ड तथा वियतनाम में और साथ ही लातिनी अमरीका के आर-पार पुरुषों के साथ यौन संबंध रखने वाले पुरुषों के भीतर एचआईवी संक्रमण का बढ़ा हुआ साक्ष्य देखने में आया है लेकिन अधिकांश राष्ट्रीय एड्स कार्यक्रम ऐसे लोगों की विशिष्ट जरूरतों की ओर ध्यान देने में असफल रहे हैं। नए आंकड़ें यह भी दर्शाते हैं कि एचआईवी निवारण कार्यक्रम लातिनी अमरीका, पूर्वी यूरोपप और विशेष रूप से एशिया की महामारियों के बीच इंजेक्शन के जरिए नशीली दवाएं लेने वालों तथा यौन कार्य के बीच अति व्याप्ति की ओर ध्यान में असफल होते जा रहे हैं।
डब्ल्यूएचओ के कार्यवाहक महानिदेशक डॉ. ऐन्डर्स नार्डस्ट्राम ने कहा कि ''यह जरूरी है कि हम एचआईवी निवारण और उपचार सेवाओं--दोनों में निवेश बढ़ाते रहना जारी रखें जिससे कि इस रोग के कारण होने वाली अनावश्यक मौतें और रुग्णता कम की जा सके। उप-सहारा अफ्रीका में जोकि सर्वाधिक प्रभावित क्षेत्र है जन्म के समय जीवन संभाव्यता केवल 47 वर्ष है जोकि उच्च आय वर्ग के देशों की तुलना में 30 वर्ष कम है।''
एड्स एपिडेमिक अपडेट यह बताता है कि लातिनी अमरीका, कैरीबियन, मधय-पूर्व और उत्तर अमरीका सहित अनेक क्षेत्रों में एचआईवी निगरानी इस कदर कमजोर है कि जोखिम की सबसे अधिक संभावना वाले लोग-पुरुषों के साथ यौन संबंध रखने वाले पुरुष, सेक्स वर्कर तथा इंजेक्शन के जरिए नशीली दवाएं लेने वाले लोग इस कारण अक्सर एचआईवी निवारण और उपचार कार्यनीतियों से वंचित रह जाते हैं क्योंकि उनकी विशिष्ट स्थितियों और वास्तविकताओं के बारे में पर्याप्त जानकारी नहीं रहती।
रिपोर्ट में इस बात का भी विशेष रूप से उल्लेख किया गया है कि अनेक देशों में सुरक्षित यौन संबंधों और एचआईवी संबंधी ज्ञान तथा वैयक्तिक जोखिम संबंधी बोध का स्तर निम्न बना रहता है। ऐसे देशों में भी जहां महामारी का बहुत भारी प्रभाव है जैसेकि स्वाजिलैण्ड और दक्षिण अफ्रीका में लोगों का एक बहुत बड़ा प्रतिशत ऐसा है जिसे यह विश्वास नहीं है कि उन्हें संक्रमित होने का खतरा है।
डॉ. पायट ने कहा, ''अपनी महामारी को जान लेना और महामारी के कारणों जैसे कि पुरुषों और महिलाओं के बीच असमानता और समलैंगिक यौन संबंधों से अत्यधिक घृणा रखने वाले व्यक्तियों की समझ एड्स के प्रति दीर्घकालीन जवाबी कार्रवाई के लिए सर्वथा जरूरी है। केवल यही नहीं कि इस दिशा में कार्रवाई में नाटकीय रूप से वृध्दि की जाए बल्कि साथ ही वह कार्यनीतिक, केन्द्रित और संधारणीय होनी चाहिए जिससे कि यह सुनिश्चित हो सके कि पैसा उन लोगों तक पहुंच सके जिन्हें उसकी सबसे ज्यादा जरूरत है।''
वार्षिक एड्स एपिडेमिक अपडेट वैश्विक एड्स महामारी के संबंध में नवीनतम हालात पर रिपोर्ट प्रस्तुत करता है। मानचित्रों और क्षेत्रीय अनुमानों सहित 2006 का संस्करण इस महामारी के विस्तार और इसके कारण मानवीय मौतों के संबंध में नवीनतम आकलन प्रस्तुत करता है और इस महामारी के होने की नई प्रवृत्तियों का पता लगाता है। यह रिपोर्ट www.unaids.org पर उपलब्ध है।
के प्रयासों और संसाधनों को वैश्विक एड्स जवाबी कार्रवाई के लिए इकट्ठा करता है। सह-प्रायोजकों में यूएनसीएचआर, यूनिसेफ, डब्ल्यूएफपी, यूएनडीपी, यूएनएफपीए, यूएनओडीसी, आईएलओ, यूनेस्को, डब्ल्यूएचओ तथा विश्व बैंक शामिल हैं। जेनेवा में स्थित यूएनएड्स सचिवालय समूचे विश्व में 75 से अधिक देशों में वस्तुत: प्रयासशील है।
अंतर्राष्ट्रीय स्वास्थ्य कार्य का निर्देशन और समन्वय करने वाले प्राधिकरण के रूप विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) एचआईवी/एड्स के प्रति वैश्विक स्वास्थ्य क्षेत्र जवाबी कार्रवाई में संयुक्त राष्ट्र प्रणाली का नेतृत्व करता है। डब्ल्यूएचओ स्वास्थ्य क्षेत्र के माध्यम से एचआईवी/एड्स के उपचार, देख्रभाल, सहायता और निवारण सेवाओं सहित उसके प्रति एक व्यापक और संधारणीय जवाबी कार्रवाई उपलब्ध कराने के निमित्त सदस्य देशों को सहायता प्रदान करने के वास्ते उन्हें तकनीकी, साक्ष्य-आधारित सहायता प्रदान करता है।
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