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पूर्वोत्तार भारत में एड्स के विरुध्द एका

Uniting Against AIDS in the Northeast

पूर्वोत्तार भारत में एड्स के विरुद्ध एका

नई दिल्ली, 12 अक्टूबर 2007

  • राज्य स्तरीय हस्तक्षेपों और साझेदारियों को सहायता प्रदान करने के लिए गुवाहाटी में देश का पहला नाको उप कार्यालय खोला गया है।
  • आस्ट्रेलियाई सरकार पूर्वोत्तार के चार राज्यों - नागालैंड, मणिपुर, मेघालय और मिजोरम - में एड्स के विरुध्द पहलकदमी के लिए 8.9 मिलियन अमरीकी डालर का निधिदान कर रही है।
  • इस पहलकदमी के अंतर्गत हर राज्य में उस विशेष राज्य के मुद्दों को लक्ष्य बनाते हुए एचआईवी रोकथाम सेवाओं, जोखिम में कमी लाने और जागरूकता निर्माण से संबंधित कार्यक्रम शामिल हैं।
  • नागरिक समाज के संगठनों के लिए स्वीडन की सरकार ने .65 मिलियन अमरीकी डालर की निधियां प्रदान की हैं।

नई दिल्ली, 12 अक्टूबर 2007 - ''महामारी को पलटो और रोको'' के संकल्प को पूरा करने की दिशा में राष्ट्रीय एड्स नियंत्रण संगठन ने पूर्वोत्तार क्षेत्र में एचआईवी और एड्स रोकथाम एवं नियंत्रण पर संयुक्त राष्ट्र संघ कार्यक्रम की शुरूआत करते हुए एक कदम आगे बढ़ाया। आस्ट्रेलियाई सरकार के 8.9 मिलियन डालर के वित्तीय अनुदान की सहायता से इस पांचवर्षीय पहलकदमी की शुरूआत माननीय राज्य स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री, सुश्री पानबक लक्ष्मी, एचआईवी/एड्स पर संसदीय फोरम के कन्वेनर और केंद्रीय श्रम एवं रोजगार मंत्री, श्री ऑस्कर फर्नांडीज, आस्ट्रेलियाई उच्चायुक्त, श्री जान मैकार्थी, स्वीडन के राजदूत, श्री लार्स ओलोफ लिंडग्रेन और राष्ट्र संघ के रेसिडेंट कोआर्डिनेटर, डॉ. मैक्साइन ओल्सन ने संयुक्त रूप से की।

इस अवसर पर बोलते हुए राज्य स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री, सुश्री पानबक लक्ष्मी ने कहा, ''यह पहलकदमी पूर्वोत्तार के राज्यों की प्रकट जरूरतों की परिणति है। यह एक साथ मिल कर एचआईवी को राष्ट्रीय प्रत्युत्तर को मजबूत बनाने हेतु भारत सरकार, राष्ट्र संघ प्रणाली और अनुदानकर्ता संस्थाओं के बीच घनिष्ठ साझेदारी को दर्शाती है। उन्होंने यह भी कहा कि यह राष्ट्रीय एड्स कार्यक्रम के चरण III की भावना को प्रतिबिंबित करती है जिसका उद्देश्य एक राष्ट्रीय प्राधिकरण, एक रणनीतिक ढांचा और एक मानीटरिंग एवं मूल्यांकन प्रणाली बनाना है।''

पूर्वोत्तार में एचआईवी और एड्स के खतरे और प्रभाव को कम करने के उद्देश्य से की गई इस पहलकदमी के मुख्य घटक इस प्रकार हैं - क्षमता निर्माण, एडवोकेसी, महिलाओं और बच्चों के लिए सहायता तथा नवाचारपूण्र् ा राज्य-विशिष्ट कार्यक्रम तैयार करना। इसमें राज्य मशीनरी और साथ ही समुदाय-आधारित सेवा प्रदाताओं के साथ साझेदारी में एक सेवा नेटवर्क विकसित करते हुए दूर-दराज के जिलों तक पहुंचना तथा एचआईवी के बारे में जागरूकता फैलाना शामिल है।

इस पहलकदमी की शुरूआत करते हुए एचआईवी/एड्स पर संसदों के फोरम के कन्वेनर और केंद्रीय श्रम एवं रोजगार मंत्री श्री आस्कर फर्नांडीज ने बताया, ''यह पूर्वोत्तर में इस महामारी को नियंत्रित करने के उद्देश्य से चलाई गई एक महत्वपूर्ण पहलकदमी है।'' इस क्षेत्र के निर्वाचित प्रतिनिधियों की प्रतिबध्दता 2005 की गुवाहाटी घोषणा और तीन राज्यों में विधायी मंचों की स्थापना से प्रकट होती है।

आस्ट्रेलियाई उच्चायुक्त, जान मैकार्थी ने बताया, ''पूर्वोत्तार की जनता के साथ हमारा लंबा संबंध रहा है। इस क्षेत्र के प्रति हमारी प्रतिबध्दता पूर्वोत्तार में राष्ट्रीय प्रत्युत्रर को मजबूत बनाने के लिए आस्ट्रेलिया सरकार द्वारा 8.9 मिलियन अमरीकी डालर के महत्वपूर्ण निधिदान से जाहिर होती है। इससे कार्यक्रम को मजबूती मिलेगी और क्षमता निर्माण, एडवोकेसी, देखरेख और सहायता आदि जैसे मुद्दों पर ध्यान केंद्रित किया जा सकेगा।''

स्वीडन के राजदूत, श्री लार्स-ओलोफ लिंडग्रेन ने कहा, ''हम पूर्वोत्तार में नागरिक समाज के संगठनों के साथ 1990 के दशक की शुरूआत से काम कर रहे हैं। हमें इस बात की खुशी है कि इस पहलकदमी से इस क्षेत्र में एचआईवी और एड्स को लेकर किये जा रहे कार्य को आगे बढ़ाने के लिए सरकार और नागरिक समाज के बीच की साझेदारियों को मजबूत बनाने में मदद मिलेगी।''

इस कार्यक्रम का एक मुख्य घटक है - पूर्वोत्तार में नाको के उप कार्यालय की स्थापना। इस पर प्रकाश डालते हुए राष्ट्र संघ के रेसीडेंस कोआर्डिनेटर, डॉ. मैक्साइन ओलसोन ने कहा, ''नाको की उपस्थिति से इस क्षेत्र में डेलिवरी कार्यतंत्र को मजबूती मिलेगी। राष्ट्र संघ आस्ट्रेलिया और स्वीडन की सरकार की सहायता से सहभागी राष्ट्र संघ संगठनों के माध्यम से राज्य एड्स नियंत्रण सोसाइटियों की सहायता हेतु तकनीकी सहायता और क्षमता निर्माणा द्वारा राष्ट्रीय कार्यक्रम को सहायता प्रदान करने के लिए प्रतिबध्द है।''

महामारी की स्थिति

उच्च रोग-व्याप्ति वाले छह में से दो राज्य मणिपुर और नागालैंड - पूर्वोत्तार में स्थित हैं। अनुमान बताते हैं देश में नशीली दवा की सुई लगाने वालों में से 30 प्रतिशत पूर्वोत्तार में हैं। नशीली दवा इंजेक्शन लगाने से एचआईवी होने का खतरा रहता है। असम और मेघालय कम रोग-व्याप्ति वाले राज्य हैं, पर वहां भी नशीली दवा के इंजेक्शनों के उपयोग की और उच्च जोखिम वाले समूहों की उपस्थिति की सूचना मिली है। इस क्षेत्र में एचआईवी का स्त्रीकरण (फेमिनाइजेशन) हुआ है; और इस कारण यहां महिलाओं के अनुकूल एचआईवी जांच और देखरेख की अधिक जरूरत है।

अतिरिक्त जानकारी के लिए संपर्क करें:

रीना वर्गीज, परफेक्ट रिलेशंस, 9910234004, rvarghese@perfectrelations.com
मनीषा मिश्रा, यूएनएड्स 91-9810882273, mishram@unaids.org

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