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नवीनतम एचआईवी/एड्स आंकड़ों और दक्षिण-पूर्व एशिया में उपचार में प्रगति पर डब्ल्यूएचओ/यूएनएड्स/यूनिसेफ की रिपोर्ट

नवीनतम एचआईवी/एड्स आंकड़ों और दक्षिण-पूर्व एशिया में उपचार में प्रगति पर डब्ल्यूएचओ/यूएनएड्स/यूनिसेफ की रिपोर्ट

नई दिल्ली, 17 अप्रैल 2007: दक्षिण-पूर्व एशिया में सफल एचआईवी हस्तक्षेप के परिणामस्वरूप इस क्षेत्र में कई महत्वपूर्ण उपलब्धियां हासिल की गई हैं जैसे कि म्यानमार और थाइलैंड में 100 प्रतिशत कंडोम उपयोग और भारत में एंटी रेट्रोवायरल उपचार सेवाओं में वृध्दि। कई अन्य निष्कर्षों के साथ यह निष्कर्ष 17 अप्रैल 2007 को नई दिल्ली में डब्ल्यूएचओ, एचआईवी/एड्स पर संयुक्त राष्ट्र संघ कार्यक्रम और यूनिसेफ द्वारा जारी ''दक्षिण-पूर्व एशिया क्षेत्र में एचआईवी/एड्स'' शीर्षक नई विस्तृत रिपोर्ट का अंग है।

इस विमोचन समारोह की अध्यक्षता डॉ. पूनम खेत्रपाल सिंह, उप क्षेत्रीय निदेशिका, डब्ल्यूएचओ, दक्षिण-पूर्व एशिया क्षेत्रीय कार्यालय, नई दिल्ली ने की। अन्य प्रमुख सहभागी इस प्रकार थे - डॉ. तेगुएस्ट गुएरमा, सह निदेशक, एचआईवी/एड्स विभाग, डब्ल्यूएचओ मुख्यालय, जेनेवा; सुश्री के. सुजाता राव, अतिरिक्त सचिव और महानिदेशिका, राष्ट्रीय एड्स नियंत्रण कार्यक्रम (नाको), नई दिल्ली; डॉ. डेनिस ब्राउन, देश समन्वयक, यूएनएड्स, नई दिल्ली; श्री के. के. अब्राहम, प्रेसीडेंट, इंडियन नेटवर्क आफ पाजिटिव पीपल, चेन्नइ; और डॉ. म्यो न्युत, एचआईवी/एड्स विशेषज्ञ यूनिसेफ दक्षिण एशिया क्षेत्रीय कार्यालय, काठमांडू।

इस रिपोर्ट में एचआईवी उपचार तक पहुंच के संबंध में नवीनतम आंकड़े दिये गऐ हैं; और साथ ही सर्वाधिक जोखिम में पड़ी आबादी, मां से बच्चे को संक्रमण और एचआईवी जांच एवं परामर्श जैसे प्राथमिकतापूर्ण स्वास्थ्य कार्यक्रम क्षेत्रों में दक्षिण-पूर्व एशिया में प्रगति का जायजा लिया गया है। इसमें कहा गया है कि दक्षिण-पूर्व एशिया - जहां एचआईवी/एड्स के साथ जीने वाले 72 लाख लोग रहते हैं - उप-सहारा अफ्रीका के बाद दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा एचआईवी प्रभावित क्षेत्र है। इस समय दक्षिण-पूर्व एशिया विभिन्न आबादी समूहों में और विभिन्न भौगोलिक क्षेत्रों में, अनेक और विविध रूपों में महामारी का सामना कर रहा है - भारत में जहां एचआईवी के साथ जीने वाले लोगों की संख्या सबसे अधिक है वहां डीपीआर कोरिया में एचआईवी संक्रमण का एक भी मामला सूचित नहीं हुआ है। थाईलैंड में महामारी के प्रभाव को सफलतापूर्वक पलटने का उदाहरण् मिला है, म्यानमार में और भारत के तमिलनाडु में एचआईवी व्याप्ति के घटने के संकेत मिले हैं।

किंतु इस रोग से जुड़ी लांछना और भेदभावकारी राष्ट्रीय कानून सीमांतक आबादी को एचआईवी रोकथाम एवं उपचार सेवाओं तक पहुंच बनाने से रोकते हैं। राष्ट्रीय प्रत्युत्तारों को मजबूत बनाने वाली अन्य मुख्य बाधाएं हैं - कमजोर स्वास्थ्य अवसंरचना, सीमित मानव संसाधन, निदान और दवाओं तक पहुंच का अभाव तथा अनिश्चित वित्तापोषण।

इस रिपोर्ट में भूमंडलीय एड्स प्रत्युत्तार में सुधार लाने के लिए निम्नलिखित सिफारिशें की गई हैं:

  • बच्चों में एचआईवी की रोकथाम, निदान और उपचार में तेजी लाने के प्रयासों को बढ़ाना।
  • एचआईवी संबंधी स्थिति का ज्ञान बढ़ाने के लिए अनेक रणनीतियां लागू करना।
  • मां से बच्चे को एचआईवी संचरण की रोकथाम के लिए सेवाओं को बढ़ाने में तेजी लाना।
  • नशीली दवाओं की सुई लगाने वालों और पुरुषों के साथ यौन संपर्क करने वाले पुरुषों सहित, सर्वाधिक जोखिम में पड़ी आबादी के लिए सेवाओं की पहुंच में सुधार लाना।
  • एचआईवी/एड्स के साथ जीने वाले लोगों के लिए रोकथाम कार्य में निवेश करना।
  • एचआईवी/एड्स के साथ जीने वाले लोगों की गुणवत्तापूर्ण टीबी रोकथाम, निदान और उपचार सेवाओं तक पहुंच में सुधार लाना।
  • अधिक दीर्घकालिक वित्तीय टिकाऊपन से संबंधित सरोकारों को लेकर काम करना।
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