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एचआईवी की व्याप्ति के आकलनों पर वक्तव्य
प्रेस सूचना नोट
8 जून 2007
एचआईवी/एड्स की महामारी को जानने के अपने सतत प्रयासों के अंग के रूप् में राष्ट्रीय एड्स नियंत्रण संगठन (नाको) यूएनएड्स और विश्व स्वास्थ्य संगठन सहित राष्ट्रीय और अंतराष्ट्रीय विशेषज्ञ समूहों के साथ मिल कर एक वार्षिक रूप से भारत में एचआईवी/एड्स के साथ जीने वाले वयस्को की संख्या का आकलन करता है। 4-6 जून 2007 को नाको ने आकलनों और अनुमानों पर कोर तकनीकी कार्यदल की एक बैठक आयोजित की। यह कार्यदल राष्ट्रीय एचआईवी व्याप्ति के आकलन करने के लिए पध्दतियों और अनुमानों के संबंध में मार्गदर्शन प्रदान करता है। इस वर्ष आकलन इस महामारी की अधिक सटीक तस्वीर प्रस्तुत करेंगे क्योंकि जनसंख्या आधारित सर्वेक्षणों के आधार पर जानकारी मिली है और उच्च जोखिम वाले समूहों के बारे में बेहतर आंकड़े प्राप्त हुए हैं। कार्यदल अभी भी राष्ट्रीय एड्स व्याप्ति के ताजा आकलन तैयार करने के लिए का विश्लेषण कर रहा है और आंकड़े जुलाई के पहले सप्ताह तक प्राप्त हो जाएंगे।
वर्तमान निगरानी डाटा के विश्लेषण द्वारा कुछ रुझानों को चिन्हित किया जा सकता है। हालांकि कुछ दक्षिणी राज्यों में प्रसव-पूर्व क्लीनिकों में व्याप्ति में गिरावट दिखाई देती है, पर पुरुषों के साथ संसर्ग करने वाले पुरुषों, नशीली दवा के इंजेक्शन लगाने वालों आदि उच्च जोखिम वाले समूहों में संक्रमण का उच्च स्तर चिंता का विषय बना हुआ है। इसी तरह आंकड़े यह भी सुझाते हैं कि जिन स्थानों में लक्ष्यबध्द हस्तक्षेप किये गए है वहां और खासकर दक्षिणी राज्यों में यौनकर्मियों के बीच एचआईवी की व्याप्ति के स्तरों में गिरावट तो आ रही है, मगर फिर भी इस समूह के बीच कुल मिला कर उच्च व्याप्ति दर बनी हुई है और इस कारण इसपर ध्यान केंद्रित किये जाने की जरूरत है। अनुभव यह दर्शाता है कि जहां कहीं भी ये समूह खुद रोकथाम का प्रयास कर रहे हैं, वहा उन्होंने रोकथाम कार्य को मजबूत नेतृत्व प्रदान किया है। अंत में यह कि वर्ष 2006 का निगरानी डाटा स्पष्ट रूप से नाको द्वारा क्रियान्वित की जा रही रोकथाम रणनीति के सही होने की पुष्टि करता है।
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