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भारत ने एड्स की महामारी की मानीटरिंग का विस्तार किया
आंकड़ा संग्रह में पध्दतियों में सुधार से प्राप्त नए आकलन भारत में एड्स की महामारी की बेहतर समझ पद्रान करते हैं।
जेनेवा, 12 जून, 2007 : इस महामारी की बेहतर रूप से समझ हासिल करने के अपने सतत प्रयासों के अंग के रूप एचआईवी/एड्स पर संयुक्त राष्ट्र संघ कार्यक्रम (यूएनएड्स) की सहायता से भारत के राष्ट्रीय एड्स नियंत्रण संगठन (नाको) भारत में एड्स की महामारी के अधिक सटीक आकलन तैयार करने के लिए विस्तारित निगरानी प्रणाली और नए जनसंख्या - आधारित सर्वेक्षण के आंकड़ों का उपयोग कर रहा है। इस नए विश्लेषण में यूएनएड्स सचिवालय और विश्व स्वास्थ्य संगठन, दोनों ही तकनीकी सहायता प्रदान कर रहे हैं।
1988 में भारत ने एक राष्ट्रव्यापी एचआईवी निगरानी प्रणाली की शुरूआत की थी जिसके अंतर्गत गर्भवती महिलाओं, एसटीआई क्लीनिकों में जाने वाले लोगों, महिला यौनकर्मियों, समलैंगिक पुरुषों और नशीली दवा की सुई लगाने वाले लोगों जैसे अनेक समूहों से एचआईवी की व्याप्ति से संबंधित आंकड़े एकत्र किये गये। इस प्रणाली को 1998 में 155 स्थानों से विस्तारित करने 2005 में 703 स्थानों तक और फिर 2006 में 1,164 स्थानों तक विस्तारित किया गया।
वर्ष 2005-2006 में भारत में अनेक अंतर्राष्ट्रीय साझेदारों की मदद से स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के नेतृत्व में एक जनसंख्या आधारित सर्वेक्षण आयोजित किया गया। ''राष्ट्रीय परिवार एवं स्वास्थ्य सर्वेक्षण'' या ''एनएफएचएस-3'' के रूप ज्ञात इस सर्वेक्षण का उद्देश्य उच्च एचआईवी व्याप्ति वाले राज्यों और साथ ही समूचे देश में एचआईवी की व्याप्ति के अनुमानित आंकड़े प्रदान करना था।
वर्ष 2007 में, पहली बार निगरानी प्रणाली से प्राप्त जानकारी को वर्ष 2005-2006 में उच्च एचआईवी व्याप्ति वाले राज्यों को उच्च जोख्चिाम वाले समूहों को लेकर किये गए समाकलित व्यवहारगत और जीववैज्ञानिक आकलन से प्राप्त आंकड़ों को जोड़ कर पूरित किया गया।
वर्ष 2006 के विस्तारित एचआईवी निगरानी प्रणाली तथा 2005-2006 के राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण से प्राप्त व्याप्ति संबंधी आंकड़ों का अलग से विश्लेषण कर लिया गया है। दोनों ही यह दर्शाते हैं कि एचआईवी की व्याप्ति पहले के अनुमानों की तुलना में निम्न स्तरों पर है। यह अधिकांश अंतर दो प्रणालियों से प्राप्त डाटा की बढ़ी हुई उपलब्धता और निम्न व्याप्ति वाले क्षेत्रों के बेहतर कवरेज के कारण है।
इस समय नाको का विशेषज्ञ दल, 4-6 जून को नई दिल्ली में आयोजित बैठक में शामिल राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय विशेषज्ञों की सिफारिशों के आधार पर, उक्त सभी आंकड़ा स्रोतों का संयुक्त विश्लेषण कर रहा है। यह विश्लेषण आकलन पध्दतियों में सुधार को इंगित करता है। संयुक्त विश्लेषण की अंतिम परिणाम जुलाई 2007 के पहले सप्ताह तक प्राप्त होने की आशा है।
यूएनएड्स सचिवालय और विश्व स्वास्थ्य संगठन ने नई और सुधरी हुई पध्दतियों को कार्यान्वित करने में भारत सरकार को मजबूत समर्थन प्रदान किया है और नए निष्कर्षों का स्वागत किया है। नये आंकड़े यह दर्शाते हैं कि भारत में पिछले अनुमानों की तुलना में कम लोग एचआईवी के साथ रह रहे हैं। किंतु इसका अर्थ यह नहीं कि रोकथाम-कार्यक्रमों का व्यापक विस्तार करने की जरूरत उतनी नहीं रह गई है। भारत में इस महामारी की बेहतर समझ से ही अधिक सघन एचआईवी हस्तक्षेप किये जा सकेंगे, उपचार रणनीतियां बनाई जा सकेंगी और भारत के एड्स प्रत्युत्तार के लिए संसाधनों को अधिक प्रभावकारी ढंग से काम पर लगाया जा सकेगा।
संपर्क संबंधी विवरण
मनीषा मिश्रा, यूएनएड्स, भारत / +919810882273 | mishram@unaids.org
सोफी बर्टन-नॉट/यूएनएड्स जेनेवा / +4122791697 | bartonknotts@unaids.org
इकबाल नंद्रा/डब्ल्यूएचओ, जेनेवा / +41227915589 | nandrai@who.int
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