Home

प्रेस विज्ञप्तियां : नए अनुमानों के अनुसार भारत में 25 लाख लोग एचआईवी के साथ जी रहे हैं

भारत में 25 लाख लोग एचआईवी के साथ जी रहे हैं

अधिक स्रोतों से प्राप्त उन्नत आंकड़े भारत में एड्स की महामारी की बेहतर समझ प्रदान करते हैं

06 जुलाई, 2007, नई दिल्ली (भारत) - आज राष्ट्रीय एड्स नियंत्रण संगठन (नाको) द्वारा जारी और यूएनएड्स और डब्ल्यूएचओ द्वारा समर्थित नये वर्ष 2006 के अनुमान यह इंगित करते हैं कि भारत में राष्ट्रीय व्यस्क एचआईवी व्याप्ति दर लगभग 0.36 प्रतिशत है जो देश में एच आई के जीने वाले लोगों की 20 लाख से लेकर 31 लाख तक की संख्या के अनुरूप है। ये अनुमान पिछले वर्ष के अनुमानों से अधिक सटीक हैं क्योंकि ये विस्तारित निगरानी प्रणाली और एक संशोधित एवं विस्तारित पध्दति पर आधारित हैं।

अपने यहां मौजूद महामारी को जानने के सतत प्रयास के अंग के रूप भारत सरकार ने हाल के वर्षों में अपनी निगरानी प्रणाली को काफी विस्तारित और उन्नत बनाया और परिधि में लिये जाने वाले जनसंख्या समूहों में वृध्दि की। वर्ष 2006 में सरकार ने 400 नये प्रहरी निगरानी स्थल बनाये और राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण-3 जो कि जनसंख्या आधारित सर्वेक्षण है के कार्य को राष्ट्रीय कार्यक्रम के तीसरे चरण का शुभारंभ करते हुए केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री, डॉ. अम्बुमणि रामदौस ने कहा, ''अधिक और उन्नति पध्दति पर आधारित आकलन संशोधन एचआईवी के फैलाव को मानीटर करने की प्रणालियों और क्षमताओं में महत्वपूर्ण सुधार का संकेत है। यह एक स्वागत-योग्य प्रगति है। दुर्भाग्य से नये आंकड़े भी यही इंगित करते हैं कि महामारी गंभीर है और एनएसीपी-3 में चिन्हि्त रोकथाम प्रयासों को वांछित तरीके से तेजी से बढाया और कार्यान्वित नहीं किया जाता तो स्थिति तीव्र रूप धारण कर सकती है। हमें यह याद रखना चाहिए कि भारत में 30 लाख लोग एचआईवी के साथ जी रहे हैं। इन लोगों को अपने जीवन में हर दिन लांछना, भेदभाव और अनुचित पूर्वाग्रहों का सामना करना पड़ता है और इन्हें हमारी सहायता की जरूरत है।'' मंत्री महोदय ने चिकित्सा पेशे से जुड़े अपने सहकर्मियों और नागरिक समाज के संगठनों का आह्वान कि वे लांछना और भेदभाव से संघर्ष करें।

अधिक ठोस और विस्तारित पध्दति से निकले हुए इन संशोधित आकलनों का उपयोग रोकथाम, देखरेख एवं उपचार के प्रयासों के नियोजन में सुधार के लिए किया जाएगा। स्वास्थ्य सचिव और राष्ट्रीय एड्स नियंत्रण बोर्ड के अधयक्ष श्री नरेश दयाल का कहना था, ''यह एक अच्छी खबर है कि एचआईवी से संक्रमित लोगों की कुल संख्या पहले जितना माना जाता था उससे कम है, पर हम इससे आत्म तुष्ट नहीं हो सकते। एचआइवी संक्रमण का लगातार और धीमा फैलाव चिंता का एक विषय है। भारत की महामारी की बेहतर समझ ने निश्चित रूप से एचआईवी रोकथाम और उपचार रणनीतियों को अधिक ठोस बनाने और संसाधनों को अधिक प्रभावकारी रूप से काम पर लगाने में सक्षम बनाया है।''

संशोधित अनुमानों के लिए प्रयुक्त की गई नई पध्दतियों का उपयोग वर्ष 2002 के बाद के वर्षों में एचआईवी की व्याप्ति का आकलन करने के लिए भी किया गया। ये आंकड़ें एचआईवी व्याप्ति में वर्ष-दर-वर्ष के रुझानों की उचित तुलना को सुगम बनाते हैं। वे यह दर्शाते हैं कि यह महामारी 2006 में थोड़ी सी गिरावट के साथ स्थिर रही है।

नए आकलनों पर टिप्पणी करते हुए तथा इसकी गलत व्याख्याओं के विरुध्द आगाह करते हुए अतिरिक्त सचिव और राष्ट्रीय एड्स नियंत्रण संगठन की महानिदेशिका, सुजाता राव ने कहा, ''नये मॉडल का उपयोग करते हुए अनेक वर्षों के लिए आंकड़ों के आकलन से हमें यह समझने में मदद मिली है कि नए निम्न अनुमानों का अर्थ यह नही है कि इस महामारी में तेज गिरावट आई है।'' एचआईवी को लेकर किये जा रहे कार्य की तीव्रता को शिथिल करने के विरुध्द सचेत करते हुए उन्होंने आगे कहा कि, ''जांबिया और खांडा जैसे कुछ देशों में इसी तरह की पध्दति का उपयोग करने से संशोधित अनुमान निम्न निकले हैं। हम इस कार्य से जुड़े सभी पक्षों को यह विश्वास दिलाएंगे कि हमें अपनी उर्जा को बनाये रखना है और पिछले दशक के संघर्ष से प्राप्त उपलब्धियों को बनाये रखना है।''

भारत के नेतृत्व में विश्वास दर्शाते हुए, यूएनएड्स के देश समन्वयक, डॉ. डेनिस ब्राउन ने कहा, ''ताजा अनुमानों से सामने आए रुझान भारत की राष्ट्रीय एड्स रणनीति की पुष्टि करते हैं। नये निम्न आकलनों से प्रोत्साहित होकर राष्ट्रीय अधिकारियों को एचआईवी कार्यक्रमों की शक्ति को बढ़ाना चाहिए। हम एचआईवी रोकथाम, देखरेख और उपचार को सार्वजनिक रूप से सुलभ कराने के अपने प्रयासों में तेजी लानी चाहिए। हालांकि एचआईवी के साथ जीने वाले लोगों की संख्या पूर्व अनुमानित संख्या से निम्न है, पर भारत में यह महामारी संख्या की दृष्टि से अभी भी विकराल बनी हुई है। निम्न व्याप्ति आकलन के बावजूद, इस महामारी को नियंत्रित करने के लिए जरूरी रोकथाम प्रयासों की लागत उतनी ही बनी हुई है जितनी पहले थी।''

डब्ल्यूएचओ के प्रतिनिधि, डॉ. सलीम हबायेब ने एचआईवी की महामारी से निबटने के लिए पिछले 15 वर्षों में भारत सरकार द्वारा अपनाये गए दृष्टिकोण की सराहना की। उन्होंने राज्यों, नागरिक समाज, साझेदार संगठनों के प्रयासों और साथ ही अनुकूल वातावरण बनाने में संचार माध्यमों की भूमिका की सराहना की। उन्होंने कहा कि, ''एचआईवी का भार अभी भी बहुत अधिक है। भारत के प्रयास, खासकर रोकथाम के प्रयास उल्लेखनीय हैं और उन्हें और भी बढ़ाया जाना चाहिए।''

एचआईवी व्याप्ति सामान्य आबादी के बीच थोड़ी गिरावट का संकेत देती है

जहां कुल मिलकर हाल के वर्षों में एचआईवी की महामारी एक स्थिर रुझान दर्शाती है, वहां राज्यों और आबादी समूहों के बीच भिन्नता नजर आती हैं। अच्छी खबर यह है कि उच्च एचआईवी बोझ वाले तमिलनाडु और अन्य दक्षिणी राज्यों में - जहां अनेक वर्षों से प्रभावकारी हस्तक्षेप किये जाते रहे हैं - एचआईवी की व्याप्ति

उच्च एचआईवी व्याप्ति वाले नए स्थानों की पहचान

एचआईवी नए क्षेत्रों में भी फैल रहा है। वर्ष 2006 के निगरानी आंकड़ों से उत्तरी राज्यों में कुछ इलाकों में उच्च एचआईवी व्याप्ति का पता चला है। उच्च व्याप्ति वाले जिले विशेषकर प. बंगाल, उड़ीसा, राजस्थान और बिहार में हैं।

असुरक्षित समूहों के बीच एचआईवी व्याप्ति का उच्च रहना जारी

वर्ष 2006 के निगरानी आंकड़े दर्शाते हैं कि उन समूहों के बीच जिन्हें एचआईवी संक्रमण का अधिक खतरा है - जैसे कि नशीली दवा की सुई लगाने वाले लोग, पुरुषों के साथ संसर्ग करने वाले पुरुष आदि - के बीच एचआईवी संक्रमण में वृध्दि हुई है। चेन्नई, दिल्ली, मुम्बई और चंडीगढ़ जैसे शहरों में नशीली दवा की सुई लगाने वालों के बीच एचआईवी पॉजिटिव लोगों की संख्या काफी अधिक पाई गई है। इसके अलावा उड़ीसा, पंजाब, प.बंगाल, उ.प्र. और केरल में भी इनकी संख्या अधिक है।

जहां आंकड़े यह सुझाते हैं कि दक्षिणी राज्यों में यौनकर्मियों के बीच एचआईवी की व्याप्ति में कमी आ रही है, वहां यह भी संकेत मिला है कि इन समूहों के बीच एचआईवी की व्याप्ति काफी उच्च स्तर पर बनी हुई है।

अतिरिक्त सचिव और नाको की महानिदेशिका, सुजाता राव के अनुसार, ''असुरक्षित समूहों के बीच महामारी पर नियंत्रण पा कर ही इस महामारी की गतिशीलता को तोड़ा जा सकता है।''

सुरक्षित रक्त पर नियमनकारी प्राधिकरण की स्थापना

प्राथमिकताओं को रेखांकित करते हुए स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि देश में रक्त संग्रह और नितरण प्रणाली को विनियमित करने के लिए ठोस कदम उठाने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य मंत्रालय एक नियमनकारी प्राधिकरण बनाने जा रहा है जो उचित कीमत पर सुरक्षित रक्त की सुलभता को विनियमित करेगा।

अतिरिक्त जानकारी के लिए संपर्क करें:

मयंक अग्रवाल/नाको/mayanknaco@gmail.com/
मनीष मिश्रा/यूएनएड्स भारत/mishram@unaids.org
इकबाल नान्दरा/डब्ल्यूएचओ जेनेवा/nandrai@who.int
शीमा रोय/डब्ल्यूएचओ (सिएरो)/roys@searo.who.int
सोफी बर्टन-नॉट/यूएनएड्स जेनेवा/bartonknotts@unaids.or

 
   यूएनएड्स भारत 2008 © सर्वाधिकार सुरक्षित |नौकरियां | हमसे संपर्क करें | वेबमास्टर | साईट सूचक | गोपनीयता