भारत में 25 लाख लोग एचआईवीवी के साथ जी रहे हैं।
संशोधित आकलन में भारत में एचआईवीवी का प्रसार कम पाया गया
भारत के राष्ट्रीय एड्स नियंत्रण संगठन (नाको) यूएनएड्स और डब्ल्यूएचओ जैसे राष्ट्रीय व अंतर्राष्ट्रीय संगठनों के समर्थन से भारत में एड्स की स्थिति पर बेहतर आंकड़ों और विधियों द्वारा संशोधित एड्स अनुमान निकाले गये हैं।
संशोधित एड्स आकलन यह दर्शाते हैं कि 2006 में भारत में करीब 25 लाख लोग एचआईवी के साथ जी रहे हैं, जिनमे व्यस्कों का प्रतिशत 0.36 है।
2002 के बाद के वर्षों के आकलनों को भी संशोधित किया गया है जिससे पिछले कुछ वर्षों में भारत में इस महामारी के रुझान का भी अधिक सटीक चित्र हमें प्राप्त हुआ है।
यह संशोधित आकलन तीन कारणों से संभव हो पाये हैं - एक नया जनसंख्या आधारित सर्वेक्षण जिसमें एचआईवीवी का एक महत्वपूर्ण अंश शामिल है; विस्तारीत सेंटिनियल सर्वेलेंस (प्रहरी निगरानी) जिसमें ऐसे समूहों को शामिल किया गया है जिनको एचआईवी संक्रमण का अधिक खतरा है; और एक नयी संशोधित विधि जो आंकड़े के नये स्रोतों का बेहतर इस्तेमाल करती है।
यह आकलन भारत में इस महामारी के प्रसार की बेहतर जानकारी प्रदान करता है और यह नई जानकारी भविष्य में एड्स कार्यक्रम के लिए जरूरी साबित होगी।
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