यूएनएड्स द्वारा नोवर्तिस की पेटेंट संबंधी चुनौती पर भारतीय न्यायालय के फैसले का स्वागत
नई दिल्ली, 7 अगस्त 2007 - एचआईवी/एड्स पर संयुक्त राष्ट्र संघ कार्यक्रम (यूएनएड्स) ने दवा कपंनी, नोवर्तिस द्वारा भारतीय पेटेंट कानून को चुनौती देते हुए दायर की गई याचिका पर मद्रास उच्च न्यायालय के फैसले का स्वागत किया है।
मई 2006 में नोवर्तिस ने भारतीय पेटेंट कानून को - विशेषकर उसके भाग 3 (घ) को यह दलील देते हुए चुनौती दी थी कि यह व्यापार संबंधी बौध्दिक संपदा अधिकारों (ट्रिप्स) के अनुसार नहीं है। न्यायालय ने फैसला दिया था कि भारतीय पेटेंट कानून के ट्रिप्स के अनुसार होने की समीक्षा करना उसके निर्णयाधिकार के अंतर्गत नहीं आता। इस फैसले में निहित रूप से भारतीय पेटेंट कानून की संप्रभुता को माना गया था।
वर्ष 2005 का यह भारतीय कानून नवप्रवर्तनकारी और प्रभावोत्पादक उत्पादों को पेटेंट सुरक्षा की गारंटी करता है और इस तरह एचआईवी और एड्स के उपचार के लिए दवाओं सहित नए उत्पाद विकसित करने के लिए भारतीय शोधकर्ताओं और दवा कंपनियों को प्रोत्साहन देता है। इसी के साथ इस कानून में ऐसी अंतर्निहित कठोर सुरक्षाएं हैं जो जानेमाने पदार्थों में छोटामोटा सुधार करने तैयार किये गए उत्पादों के लिए पेटेंट प्रदान करने को वर्जित करती हैं। ये सुरक्षाएं एंटीरेट्रोवायरल दवाओं जैसी जीवनसेवी दवाओं के प्रामाणिक जेनेरिक संस्करणों के विरुद्व हल्की फुल्की चुनौतियों को हतोत्साहित करती हैं। अत: यह फैसला एचआईवी से संक्रमित लोगों के लिए एक अच्छी खबर है।
यूएनएड्स एचआईवी से प्रभावित लोगों के अधिकारों की रक्षा करने और एचआईवी के साथ जीवन बिताने वाले लोगों को सार्वभौम रूप से उपचार, देखरेख एवं सहायता सुलभ कराने की दिशा में प्रगति को सुनिश्चित करने के प्रयास में भारत सरकार को सहायता प्रदान करता रहेगा।
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मनीषा मिश्रा । यूएनएड्स भारत - +9198108822731
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