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उत्तर भारत में कण्डोम प्रोन्नति अभियान को राष्ट्र संघ सार्वजनिक संबंध पुरस्कार

उत्तर भारत में कण्डोम प्रोन्नति अभियान को राष्ट्र संघ सार्वजनिक संबंध पुरस्कार

न्यू यार्क, 20 अगस्त 2007

सुरक्षित यौन तौर तरीकों और परिवार नियोजन के अंग के रूप कण्डोमों के सतत उपयोग को प्रोन्नत करने के उद्देश्य से चलाए गए संचार माध्यम संबंध अभियान को सार्वजनिक संबंधों में असाधारण उपलब्धि के लिए वर्ष 2007 के राष्ट्र संघ पुरस्कार के लिए चुना गया है।

इस अभियान को - जिसका नाम है ''कण्डोम बिंदास बोल'' को उत्तरी भारत के 8 राज्यों में कण्डोमों के उपयोग और बिक्री में आई गिरावट की समस्या को दूर करने के उद्देश्य से तैयार किया गया था। भारत का 45 प्रतिशत कण्डोम बाजार इन्हीं राज्यों में है। भारत की एक अरब आबादी का 40 प्रतिशत इन्हीं आठ राज्यों - दिल्ली, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, उत्तरांचल, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, बिहार और झारखंड - में रहता है।

''कण्डोम बिंदास बोल'' नारे के माध्यम से इस अभियान ने लोगों को दो संदेशों का उपयोग करने के लिए प्रोत्साहित किया। पहला संदेश यह था कि कण्डोम कोई 'नाजुक' शब्द नहीं है और इसके उपयोग पर खुल कर चर्चा की जानी चाहिए। दूसरा संदेश यह था कण्डोम केवल उच्च जोखिम वाले समूहों के लिए ही नहीं, बल्कि सभी के उपयोग के लिये है।

वेबेक शेंडविक, नई दिल्ली द्वारा तैयार किया गया सामाजिक अभियान एक यूएसएड्स परियोजना, पीएसपी - वन; आईसीआईसीआई बैंक और भारत सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय का संयुक्त प्रयास है।

इसके साथ ही सिंगापुर की ''यलो रिबन परियोजना'' और टर्किश अखबार "मिलियत" द्वारा चलाई गई ''डैडी सेंड मी टु स्कूल'' परियोजना को भी सराहा गया।

सिंगापुर की जेलों से हर साल 11,000 कैदी बाहर निकलते हैं। यलो रिबन परियोजना उन्हीं को लेकर बनाई गई है।

इस परियोजना का उद्देश्य समुदायों को भूतपूर्व अपराधियों के पुनर्वास, सहायता और उन्हें समाज का अंग बनाने के लिए प्रेरित करना है। भूतपूर्व अपराधियों को एक और मौका देकर और जागरूकता पैदा करके यह परियोजना लांछना और पूर्वाग्रह की समस्या पर भी ध्यान देती है। इसे बुर्सन मास्ट्रेलर (एसईए) प्रा. लिमिटेड के साथ सिंगापुर कारावास सेवा द्वारा प्रायोजित किया गया है।

''डैडी सेंड मी टु स्कूल'' परियोजना को टर्की में जेंडर असमानता और शिक्षा तक महिलाओं की पहुंच के मुद्दों पर काम करने के लिए अप्रैल 2005 में शुरू किया गया था। परियोजना ने लड़कियों के लिए 21 विश्वविद्यालय डारमेटरियां बनाने, और माता-पिता, शिक्षकों एवं मिलियत के पाठकों में जागरूकता पैदा करने के लिए वित्तीय सहायता जुटाई।

राष्ट्र संघ पुरस्कार 6 नवम्बर, मंगलवार को लंदन में एक समारोह में प्रदान किये जाएंगे।

यह वार्षिक पुरस्कार राष्ट्र संघ के सार्वजनिक सूचना विभाग और वरिष्ठ अंतर्राष्ट्रीय सार्वजनिक संबंध अधिकारियों के एक पेशेवर संगठन, इंटरनेशनल पब्लिक रिलेशंस एसोसिएशन (इप्रा) द्वारा संयुक्त रूप से प्रायोजित किया जाता है। यह पुरस्कार राष्ट्र संघ के सम्मुख उपस्थित प्राथमिकता के मुद्दों पर चलाये जाने वाले उत्कृष्ट अभियानों को मान्यता देने के लिए 1990 में शुरू किया गया था।

अधिक जानकारी के लिए कृपया संपर्क करें: email: daoudd@un.org; फोन: +1 917 367 1088.

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