
एशिया के अधिकतर एचआईवी रोगियों को उपचार उपलब्ध नहीं
कोलम्बो, श्रीलंका, 22 अगस्त 2007
एशिया में एचआईवी के साथ जीने वाले अधिकतर लोगों को अभी भी उपचार की सुविधा उपलब्ध नहीं है। एशिया और प्रशांत क्षेत्र में एड्स विषय पर आयोजित अंतर्राष्ट्रीय/ एड्स यूनिट, केयर और यूएनएड्स ने इस बात को रेखांकित किया कि एशिया में निर्धन और सीमांत समुदायों को प्रभावकारी ढंग से और लागत पर उपचार सुलभ कराने की जरूरत है। इन तीन संगठनों ने सेवाओं की उपलब्धता, दवाओं की कीमतें, उपचार केंद्रों तक लंबी दूरी तय करने और जेंडर एवं लांछना से जुड़ी सामाजिक-सांस्कृतिक बाधाओं सहित उपचार तक पहुंच को प्रभावित करने वाले सभी मुद्दों को हल करने की जरूरत पर बल दिया।
यूएनएड्स के देश निदेशक डॉ. डेनिस ब्राउन ने कहा, ''एशिया में लाखों रोगी ऐसे हैं जो एआरवी उपचार के लिए दवाएं निजी दवा खानों से खुद की जेब से पैसा खर्च करके खरीदते हैं क्योंकि सरकारी क्षेत्र द्वारा मुफ्त में वितरित दवा प्राप्त करने में काफी अधिक लागत आती है। अगर उन्हें एआरवी दवाएं मुफ्त में मिल भी जाती हैं तो अवसरवादी संक्रमणों के उपचार और प्रयोगशाला जांचें कराने के लिए उन्हें काफी पैसा खर्च करना पड़ता है।
केयर, यूएसए की सुश्री मधु देशमुख का कहना था, ''एचआईवी के साथ जीने वाले लोगों के लिए उपचार सुलभ कराने के संबंध में बहुत सी भौतिक और भौगोलिक चुनौतियां मौजूद हैं जो सामाजिक-सांस्कृतिक कारकों की वजह से समाज के पहले से ही सीमांतीकृत समूहों के लिए और भी जटिल रूप धारण कर लेती हैं।
सम्मेलन के दौरान बौध्दिक संपदा और अनिवार्य लाइसेंसिंग के मुद्दों पर भी गहन चर्चा की गई। भारतीय पेटेंट कानून को चुनौती देने वाली स्विस दवा कंपनी नोवार्तिस की याचिका को रद्द करते हुए भारतीय उच्च न्यायालय ने हाल में जो फैसला सुनाया, सहभागियों ने उसकी सराहना की। लायर्स कलैक्टिव, भारत के श्री आनंद ग्रोवर का विचार था कि: ''एशिया में निर्धनों को उचित कीमत पर दवाएं उपलब्ध कराने की संभावना खतरे में है, हालांकि भारत में जेनेरिक दवाओं के उत्पादन की सबसे हाल की चुनौती को भारतीय न्यायालयों ने खारिज कर दिया है, पर कुछ समय बाद ही अगली चुनौती सामने आ सकती है। इस लगातार चलने वाले झगड़े से न तो दवा कंपनियों का भला होगा और न ही सरकारों या एचआईवी के साथ जीने वाले लोगों का" सम्मेलन में एक ऐसा प्रतिमान तैयार करने की जरूरत को उजागर किया गया जो उपचार तक पहुंच के अधिकार और बौध्दिक संपदा अधिकारों के बीच संतुलन बना सके। साथ ही एचआईवी के साथ जीने वाले लोगों को नीति - निर्माण और उपचार कार्यक्रमों के कार्यान्वयन में शामिल करने के महत्व पर भी बल दिया गया।
अधिक जानकारी के लिए कृपया संपर्क करें: अमीलिया एंड्रयूज, केयर +91 9313869174 amelia@careindia.org
मनीषा मिश्रा, यूएनएड्स +91 9810882273 mishram@unaids.org
चान पार्क लायर्स कलेक्टिव +91 9899452377 chan.park@lawyerscollective.org
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