हिजड़ों की बैठक ने हिंजड़ा समुदाय की एचआईवी संबंधी असुरक्षाओं को उजागर किया
हिजड़ों की उत्तारी भारत के पहली बैठक में भाग लेने वाले एक हिंजड़े की प्रार्थना थी, ''कृपया गृह मंत्रालय में हमारे लिए एक ऐसी गोपनीय हाट लाइन की व्यवस्था करें जो हमारी सच्ची शिकायतों की सुनवाई कर उस पर कार्रवाई करें। यूएनएड्स द्वारा यह बैठक मार्च 29 को दिल्ली के बाहरी क्षेत्र मानेसर के निकट आयोजित की गई थी। इस बैठक का आयोजन हिजड़ों की एचआईवी संबंधी असुरक्षाओं को दूर करने हेतु उनकी तात्कालिक जरूरतों पर विचार करने के लिए आयोजित की गई थी।
इस गहन और अत्यंत मुखर कार्यशाला में सात-सूत्री मांगपत्र तैयार किया गया जिसे भारत सरकार के सम्मुख प्रस्तुत किया जाएगा। ये मांगें इस प्रकार हैं:
- आईपीसी की धारा 377 का इस तरह बनाना कि दो वयस्कों के बीच सहमतिपूर्ण यौन कार्य को आईपीसी की धारा 377 की - जो हिजड़ों के साथ यौन कार्य को ''अप्राकृतिक'' कहती है - धारा 377 के दायरे से बाहर रखा जाए।
- सरकार गुदा/मुख एसटीआई उपचार को मंजूरी दे और सभी सरकारी एवं निजी अस्पतालों के लिए एमएसएम/टीजी मैनुअल हो।
- टीजी संगठन/सीबीओज को मानचित्रण और आकार आकलन के लिए निधियां दी जाएं।
- सरकारी दस्तावेज, उदाहरण के लिए पैन कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस, राशन कार्ड, बैंक एकाउंट, मतदाता पहचान पत्र/स्कूलों और कालेजों में प्रवेश।
- तृतीयक (टर्शियरी) अस्पतालों में हिजड़ों के लिए बिस्तरों का आरक्षण।
- सरकारी अस्पतालों में एसआरएस और यूरेथ्रल डाइलेशन उपचार।
- कौशल निर्माण और पुनर्वास
- हैल्पलाइन: सभी हिजड़ों तक पहुंचायी जाए।
यूएनएड्स ने उत्तार भारत के हिंजड़ा समुदाय की बैठक दिल्ली के किसी भी होटल में करने की पांच बार कोशिश की। अंत में राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र के न्यायाधिकार से बाहर मानेसर में एक कंट्री क्लब में यह बैठक आयोजित करने में सफलता मिली। राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में एक भी होटल ऐसा न था जो इस समुदाय की समस्याओं को उजागर करने के लिए स्थान दे पाता।
अधिक जानकारी के लिए संपर्क करें: अशोक रोव कवि, तकनीकी सलाहकार, यूएनएड्स इंडिया, 91-9818616694 |