यूएनएड्स के कार्यकारी निदेशक प्रतिष्ठित मानवतावादी
पुरस्कार प्राप्त करते हुए
26 जनवरी 2008

भारतीय कैथलिक बिशप कांफ्रेंस के प्रेसीडेंट, कार्डिनल थेलसफोरे पी. टोपो यूएनएड्स कार्यकारी निदेशक, डॉ. पीटर पियोट (Peter Piot) को 26 जनवरी 2008 को आयोजित समारोह में ब्लेस्ड मदर टेरिसा अंतर्राष्ट्रीय मानवतावादी पुरुस्कार ''प्रदान करते हुए।
पहला ''ब्लेस्ड मदर टेरिसा अंतर्राष्ट्रीय मानवतावादी पुरुस्कार यूएनएड्स के कार्यकारी निदेशक, डॉ. पायोट को ''विकासशील विश्व में एचआईवी के साथ जीने वाले लोगों के जीवन पर महत्वपूर्ण प्रभाव'' डालने के लिए दिया गया।
डॉ. पायोट को यह पुरुस्कार भारतीय कैथलिक बिशप कांफ्रेंस के प्रेसीडेंट, कार्डिनल थेलेसफोरे पी. टोपो ने नई दिल्ली में 26 फरवरी 2008 को आयोजित एक विशेष समारोह में दिया। इस पुरुस्कार में वे यूएस ग्लोबल एड्स कोआर्डिनेटर के साथ हिस्सेदारी करेंगे - जिन्हें यह पुरुस्कार 3 मार्च को इंदिरा गांधी राष्ट्रीय वि.वि. में आयोजित वार्षिक मदर टेरिसा स्मृति समारोह के दौरान दिया जाएगा।
इस पुरुस्कार की स्थापना भारत कैथलिक बिशप सम्मेलन के स्वास्थ्य आयोग ने स्वयं मदर टेरिसा जैसे मानवीय सरोकार दर्शाने वाले समर्पित व्यक्तियों के कार्यों को मान्यता देने के लिए की थी।

मिशन निदेशक, यूएसएड, डॉ. जार्ज डेइकुन; भारत की कैथलिक बिशप कांफ्रेंस के प्रेसीडेंट, कार्डिनल ट
थेलसफथोरे पी. टोपो; यूएनएड्स के कार्यकारी निदेशक, डॉ. पीटर पियोट (Peter Piot); भारत की कैथलिक बिशप कांफ्रेंस के स्वास्थ्य आयोग के कार्यकारी सचिव,
फादर एलेक्स वाडाकुमथाल
पुरुस्कार समारोह में बोलते हुए डॉ. पायोट ने कहा, ''में यह पुरस्कार पूरे राष्ट्र संघ परिवार, और विशेषकर यूएनएड्स के अपने सहकर्मियों - जो मदर
टेरिसा की तरह जरूरतमंद लोगों की सहायता के लिए कार्य करते हैं - के योगदान को मान्यता के रूप स्वीकार करता हूं। निश्चय ही हम उन आदर्शों से प्रेरित हैं जिन आदर्शों से मदर टेरिसा ने अपने जीवन भर सहिष्णुता, दया और समावेशिता से परिपूर्ण अपने कार्य के माध्यम से प्रोन्नत किया था।''
डॉ. मायोट ने एड्स को लेकर काम करने तथा एचआईवी के साथ जीने वाले लोगों की मदद करके मदर टेरिसा की करुणा और सम्मान की परम्परा को आगे बढ़ाने के लिए भारतीय कैथलिक चर्च की सराहना की।
अल्बानिया में जन्मी मदर टेरिसा आर्डर ऑफ मिशनरीज ऑफ चैरिटी की संस्थापक थीं। यह महिलाओं का एक कैथलिक संगठन है जो भारत में निर्धनों की सहायता के लिए काम करता है। मदर टेरिसा ने एक साधारण नन का जीवन जीते हुए सभी के हृदय को छू लिया। 1979 में उन्हें शांति के लिए नोबल पुरस्कार से सम्मानित किया गया।
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