यूएनएड्स के आकार आकलन अध्ययन के अनुसार, ''पंजाब और हरियाणा में नशीली दवा के इंजेक्शन के उपयोग में वृध्दि'' हो रही है।
नई दिल्ली, 21 जनवरी 2008
दो राज्यों (चंडीगढ सहित) में नशीली दवा का इंजेक्शन लगाने वालों की संख्या में आकलन के लिए किये गए एक अध्ययन के अनुसार पंजाब और हरियाणा में नशीली दवा की सुई के उपयोग तथा एचआईवी संक्रमण की स्थिति पर इसके प्रभाव की ओर तत्काल ध्यान देने की जरूरत है।
यह तथ्य व्यापक रूप से जाना जाता है कि चेन्नई, दिल्ली और मुम्बई महानगरों में पूर्वोत्तर राज्यों तथा मणिपुर और नागालैंड में नशीली दवा की सुई का उपयोग होता रहा है नशीली दवा की सुई का उपयोग करने वाली आबादी के आकार के आकलन के लिए एक नये प्रकार की पध्दति का उपयोग करके इस अध्ययन में यह अनुमान लगाया गया है कि पंजाब में नशीली दवा की सुई लगाने वालों की आबादी 2600 (निम्न सीमा) और 18148 (ऊपरी सीमा) के बीच हो सकती है। हरियाणा के मामले में ये आंकड़े 2265 से 15858 तथा चंडीगढ (पंचकुला और मोहानी सहित) के मामले में 762 से 1178 हो सकते हैं। उच्च व्याप्ति वाले जिलों के मामले में ये अनुमान इस प्रकार हैं: फरीदकोट-मांगा-900, गुरदासपुर-825, कैथल-कुरुक्षेत्र-1125 और पटियाला-1100
नशीली दवा का इंजेक्शन लगाने वालों में से ज्यादातर लोग 18-30 वर्ष के हैं। इनमें से अधिकतर किसी-न-किसी प्रकार के रोजगार में लगे हैं और कई लोग शमनकारी दवाओं (सीडेटिव्स) के साथ अन्य दवाओं को मिला कर इसका उपयोग करते हैं। इनमें से 34 से 94 प्रतिशत लोगों का कहना है कि उन्होंने एक दूसरे की सुइयों का उपयोग किया है। एचआईवी के फैलाव की दृष्टि से इसके गंभीर अर्थ हो सकते हैं। नैको के 2006 के निगरानी आंकड़ों के मुताबिक पंजाब और चंडीगढ़ में नशीली दवा का इंजेक्शन लगाने वालों के बीच एचआईवी संक्रमण 13 प्रतिशत है।
वर्ष 2007 के आरंभ में यूएनएड्स ने एसवाईएम (सोसाइटी फॉर प्रोमोशन ऑफ यूथ एंड मासिज) को नेशनल ड्रग डिपेंडेंस ट्रीटमेंट सेंटर (एनडीडीटीसी) और अखिल भारतीय जाने चाहिए।
अध्ययन क्षेत्र में नशीली दवा का इंजेक्शन लगाने वालों में से अधिकतर युवक हैं, जिनमें से कई विवाहित और यौन रूप से सक्रिय हैं, इसलिए इन लोगों के लिए नियोजित किसी भी एचआईवी कार्यक्रम में एचआईवी के यौन संचरण के मुद्दों पर ध्यान दिया जाना चाहिए। रिपोर्ट में बल देते हुए कहा गया है कि इस संदर्भ में, ''नियमित यौन साझेदारों यानी नशीली दवा की सुई लगाने वालों की पत्नियों तक पहुंचना बहुत महत्वपूर्ण है। मणिपुर और नागालैंड के अनुभव ने यह दर्शाया है कि जब नशीली दवा या इंजेक्शन लगाने वालों के बीच एचआईवी की व्याप्ति एक नाजुक स्तर पर पहुंच जाती है तो यह संभावित रूप से यौन साझेदारों को प्रभावित कर सकती हैं, और अंतत: सामान्यीकृत महामारी का रूप ले सकती है।''
पंजाब, हरियाणा और चंडीगढ़ में नशीली दवा की सुई के उपयोग को लेकर किया गया यह आकार आकलन सर्वेक्षण अपनी तरह का पहला ऐसा अध्ययन है। इसमें उत्तारदाता चालित सैंपलिंग (आरडीएस) का उपयोग किया गया जिसका अर्थ है नशीली दवा की सुई लगाने वालों को भर्ती करना जो प्रशिक्षित साक्षात्कारकर्ताओं को अपनी आपबीती बताते हैं तथा साथ ही इनमें से प्रत्येक तीन अन्य उत्तारदाताओं का आयुर्विज्ञान संस्थान (एआईआईएमएस) के विशेषज्ञों की तकनीकी सहायता से पंजाब, हरियाणा और संघ-शासित प्रदेश, चंडीगढ़ में नशीली दवा का इंजेक्शन लगाने वालों की संख्या का आकलन करने के लिए एक गहन अध्ययन का कार्य सौंपा था। यूएनएड्स के देश समन्वयक, डॉ. डेनिस ब्राउन का कहना है कि इस अध्ययन की रिपोर्ट ने नशीली दवा का इंजेक्शन लगाने वालों के संबंध में जानकारी के अभाव की पर्याप्त रूप से पूर्ति की है।
इस सर्वेक्षण को एक नए रास्ते खोलने वाला शोध बताते हुए, डॉ. ब्राउन ने कहा कि अब एक प्रभावकारी कार्यक्रम के आधार के रूप एक गुणवत्तापूर्ण साक्ष्य प्राप्त हो गया है। उनके अनुसार नशीली दवा का इंजेक्शन लगाने के असुरक्षित तौर तरीकों से एचआईवी संचररण के उच्च जोखिम के बारे में अधिक जागरुकता पैदा करना इस मुद्दे से निबटने की दिशा में पहला प्रभावकारी कदम है। इसके बाद एचआईवी संचरण के जोखिम को समाप्त करने के लिए हस्तक्षेप किये हवाला देता है, एक श्रृंखला नमूना पध्दति द्वारा वांछित नमूना (सैंपलिंग) आकार निर्धारित किया गया। इसके अलावा राज्य में गैर सरकारी संगठनों द्वारा संचालित उपचार केंद्रों को भेजी गई प्रश्नावलियों के माध्यम से भी जानकारी प्राप्त की गई।
उनसे विशेष रूप से पूछा गया कि नशीली दवा की सुई लगाने वाले कितने लोग वहां उपचार करा रहे हैं। इसके बाद बहुगुणन (मल्टीप्लायर) तकनीक का उपयोग करके हर जिले में नशीली दवा का इंजेक्शन लगाने वाली की आबादी का आकलन किया गया।
इस अनूठी सर्वेक्षण पध्दति का उपयोग देश भर में अन्यत्र नशीली दवा के इंजेक्शन के उपयोग की सीमा का पता लगाने के लिए किया जा सकता है। इस समस्या से निबटने हेतु उपयुक्त रणनीतियां तैयार करने की दृष्टि से यह जानकारी नीति निर्माताओं और कार्यक्रम नियोजकों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।
पंजाब के राज्यपाल महामहिम जनरल (सेवानिवृत्ता) एस.एफ.रोड्रिग्स ने इस रिपोर्ट का आज यहां, पंजाब, हरियाणा और चंडीगढ़ की राज्य एड्स नियंत्रण सोसाइटी के सहयोग से सोसाइटी फॉर प्रमोशन ऑफ यूथ एंड मोसिज तथा यूएनएड्स भारत देश कार्यालय द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित एक समारोह में, विमोचन किया और साथ ही इस अवसर पर मुख्य अभिभाषण दिया।
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