ग्लोबल फंड द्वारा भारत को 10 करोड़ अमरीकी डॉलर के एचआईवी/एड्स अनुदान के नवीकरण के अवसर पर संवाददाता सम्मेलन

बाएं से दाएं - डॉ. डेंनिस ब्राउन, देश समन्वयक, यूएनएड्स भारत; श्री नरेश दयाल, स्वास्थ्य सचिव, भारत सरकार; डॉ. मिशेल कज़ात्चकिने, कार्यकारी निदेशक, ग्लोबल फंड फॉर एड्स, टी.बी. एंड मलेरिया; डॉ. अम्बुमणि रामदोस स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री, भारत सरकार; श्री रजत गुप्ता, अध्यक्ष, ग्लोबल फंड फॉर एड्स, टी.बी. एंड मलेरिया बोर्ड; सुश्री सुजाता राव, अतिरिक्त सचिव और महानिदेशिका, राष्ट्रीय एड्स नियंत्रण संगठन, स्वास्थ्य मंत्रालय, भारत सरकार
नई दिल्ली, 20 दिसंबर 2007 - आर्थिक कार्य विभाग, भारत सरकार के निदेशक, श्री प्रशांत और ग्लोबल फंड टु फाइट एड्स टयूबरकलोसिस एंड मलेरिया के कार्यकारी निदेशक, डॉ. मिशेल कज़ात्चकिने ने आज भारत में एड्स कार्यक्रम के दूसरे दौर के लिए 10 करोड़ अमरीकी डॉलर के अनुदान समझौते पर हस्ताक्षर किये। इस नए अनुदान के साथ ही भारत में तीन महामारियों से लड़ने के लिए ग्लोबल फंड के संसाधनों की कुल मंजूर राशि अब 49 करोड़ 20 लाख अमरीकी डॉलर हो गई है।
यह अनुदान मूल रूप् से ग्लोबल फंड के चौथे निधिदान चक्र के दौरान मंजूर किया गया था। अनुदान राशि का उपयोग वर्ष 2005 से आरंभ किया गया। हाल में यह अनुदान ग्लोबल फंड की दूसरे दौर की प्रक्रिया को निबटाने में सफल रहा। दूसरे दौर की प्रक्रिया को अनुदान के जीवन-चक्र में एक जांच बिंदु (चैक प्वाइंट) बनाया गया है। निधि आरंभ में प्रस्ताव-अवधि के पहले दो वर्षों के लिए दी जाती है। बाकी तीन वर्षों के लिए केवल उन अनुदानों को ही जारी रखा जाता है जिनका कार्य-प्रदर्शन संतोषप्रद होता है।
भारत के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री, डॉ. अम्बुमणि रामदोस ने कहा, ''यह भारत में एड्स के विरुध्द संघर्ष के लिए और देश के एचआईवी से संक्रमित और प्रभावित लोगों के लिए एक अच्छी खबर है। पहले दो वर्षों के दौरान कार्यक्रम के मजबूत कार्य-प्रदर्शन को आधारत बनाते हुए इन नये संसाधनों का उपयोग जहां तक संभव होगा, सर्वोत्ताम रूप से किया जाएगा।''
प्रमुख अनुदान प्राप्तकर्ता, भारत सरकार का आर्थिक कार्य विभाग इस पैसे का उपयोग देश भर में एंटीरेट्रोवाइरल (एआरवी) उपचार कार्यक्रमों की मजबूती और विस्तार के लिए तथा गुणवत्तापूर्ण स्वैच्छिक परामर्श एवं जांच सेवाओं तक लोगों की पहुंच को बढ़ाने के लिए करेगा। इसके साथ ही इन संसाधनों का उपयोग दक्षतापूर्ण संप्रेषण प्रयासों के जरिये इस रोग से जुड़ी लांछना और कलंक से निबटने तथा और अधिक संख्या में पेशेवरकर्मियों को प्रशिक्षण देने के लिए किया जाएगा।
ग्लोबल फंड के कार्यकारी निदेशक, डॉ. मिशेल कज़ात्चकिने का कहना था, ''एड्स के साथ जीने वाले लोगों की देखरेख एवं उपचार प्रदान करने तथा बहुत से लोगों के लिए लांछना और भेदभाव का खतरा पैदा करने वाले सामाजिक रवैयों को बदलने के लिए जो महत्वपूर्ण कार्य किया जा रहा है, उसे अपना निधिदान जारी रखने पर हम गर्व महसूस करते हैं। भारत में एड्स के साथ जो लांछना की भावना और भेदभाव जुड़े हुए हैं उनसे एचआईवी पाजिटिव लोगों के उपचार और देखरेख में विलंब हो रहा है और लोग अपनी जांच कराने के लिए आगे नहीं आ रहे हैं। मैं भारत के लोगों से आग्रह करता हूं कि वे आगे आकर एड्स के बारे में खुल कर बात करें।''
डॉ. कज़ात्चकिने और ग्लोबल फंड बोर्ड के अध्यक्ष, श्री रजत गुप्ता इन दिनों भारत में ग्लोबल फंड की सहायता से चलने वाले कार्यक्रमों का जायजा लेने और नागरिक समाज की प्रतिनिधियों और सरकारी अधिकारियों से भेंट करने के लिए भारत के दौरे पर आए हुए हैं।
अतिरिक्त जानकारी के लिए संपर्क का पता: रंजन द्विवेदी, यूएनएड्स, dwivedi@unaids.org; टेलिफोन: +91-9810505068 |