संयुक्त मिशन एड्स के संबंध में भारत की जवाबी कार्रवाई की प्रशंसा करता है और सतत् नेतृत्व तथा समन्वय के लिए आह्वान करता है

सर सूमा चक्रवर्ती और डॉ. पीटर पायट के नेतृत्व में डीएफआईडी-यूएनएड्स आयोग का बिहार राज्य का दौरा--शिष्टमंडल के अधयक्ष उदघाटन दीप प्रज्ज्वलित करते हुए
बाएं से दाएं 1. सर सूमा चक्रवर्ती, स्थायी सचिव, डीएफआईडी, यूके सरकार; 2. प्रोफेसर अरुण कुमार, अधयक्ष, बिहार राज्य विधायी परिषद (अंशत: दीखते हुए; श्री चंद्र मोहन राय, स्वास्थ्य मंत्री, बिहार राज्य); 3. श्री नीतीश कुमार, मुख्यमंत्री, बिहार; तथा 4. डॉ. पीटर पायट, कार्यकारी निदेशक, यूएनएड्स;
भारत में आए एक संयुक्त मिशन के दौरे पर आए युनाइटेड किंगडम तथा एचआईवी/एड्स संबंधी संयुक्त राष्ट्र कार्यक्रम (यूएनएड्स) के एड्स नेताओं ने एड्स के संबंध में जवाबी कार्रवाई करने में भारत जो प्रगति कर रहा है उसकी सराहना की। इसके साथ-साथ उन्होंने एचआईवी के संक्रमण के सर्वाधिक जोखिम से ग्रस्त व्यक्तियों तक पहुंचने वाली कार्यनीतियों में पैनापन लाने के लिए राजनैतिक सर्वसम्मति और जन सहयोग का लाभ उठाने की जरूरत पर बल दिया।
चार दिन के इस दौरे के मौके पर सर सूमा चक्रवर्ती, स्थायी सचिव, डिपार्टमेंट फार इंटरनेशनल डेवलपमेंट (डीएफआईडी) तथा डॉ. पीटर पायट, कार्यकारी निदेशक, यूएनएड्स ने स्वास्थ्य मंत्री डॉ. अम्बूमणि रामदास, वित्त मंत्री श्री चिदंबरम तथा गृह मंत्री श्री शिवराज पाटिल सहित वरिष्ठ अधिकारियों के साथ चर्चा की। साथ ही उन्होंने भारत में राजनीतिक दलों के अन्य नेताओं, वरिष्ठ सांसदों तथा छात्रों और गैर-सरकारी संगठनों तथा दाता समुदाय के प्रतिनिधियों के साथ भी मुलाकात की।

निर्माण भवन, नई दिल्ली, भारत में बैठक के बाद डॉ. अम्बूमणि रामदास, केन्द्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्री तथा डॉ. पीटर पायट, कार्यकारी निदेशक, यूएनएड्स जिनके पीछे खड़े हैं सर सूमा चक्रवर्ती, स्थायी सचिव, डीएफआईडी
शिष्टमंडल ने इस महामारी के सामाजिक कारणों विशेष रूप से लैंगिक विषमता को समझने और उसकी ओर ध्यान देने के महत्व पर बल दिया तथा एक ऐसी व्यापक एचआईवी जवाबी कार्रवाई की जरूरत के लिए आग्रह किया जोकि एचआईवी संक्रमण के जोखिम को बढ़ाने वाले तत्वों की ओर ध्यान देती है।

व्हीलर सीनेट हाल, पटना विश्वविद्यालय, पटना में 16 दिसम्बर, 2006 को छात्रों के साथ वैचारिक आदान-प्रदान सत्र के दौरान संयुक्त मिशन के अधयक्ष डॉ. पीटर पायट, कार्यकारी निदेशक, यूएनएड्स तथा सर सूमा चक्रवर्ती, स्थायी सचिव, डिपार्टमेंट फार इंटरनेशनल डेवलपमेंट (डीएफआईडी), बिहार राज्य के राज्यपाल महामहिम आर. एस. गवई तथा बिहार विधानसभा के अधयक्ष श्री उदय नारायण चौधरी सहित पटना विश्वविद्यालय के कुलपति का अभिवादन करते हुए
पूर्व में इस शिष्टमंडल ने पटना का दौरा किया और राज्य में राजनैतिक नेताओं के साथ मुलाकात की। यूनाइटेड किंगडम तथा एचआईवी/एड्स पर संयुक्त राष्ट्र कार्यक्रम (यूएनएड्स) के एड्स नेताओं द्वारा शनिवार 16 दिसम्बर को एक विशेष संयुक्त शिष्टमंडल के दौरे के मौके पर बिहार के उत्तरी भारत राज्य में राजनैतिक नेताओं से एचआईवी जागरूकता, निवारण, देखभाल और सहायता के पैमाने में तेजी से वृध्दि किए जाने का आग्रह किया गया। इसके साथ-साथ शिष्टमंडल ने इन लक्ष्यों की पूर्ति करने में राज्य की प्रतिबध्दता की सराहना की। बिहार का एक दिन का दौरा भारत में एक व्यापक संयुक्त डीएफआईडी/यूएनएड्स मिशन का एक अंग था जिसमें डॉ. पायट और सर चक्रवर्ती राजनैतिक नेताओं, वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों और सांसदों, छात्रों तथा गैर-सरकारी संगठनों और दाता समुदाय के प्रतिनिधियों के साथ भी दिल्ली में मुलाकात करेंगे।
यह संयुक्त मिशन इस बात का पता लगाने का एक अवसर था कि एड्स महामारी के प्रति स्थानीय जवाबी कार्रवाई को किस प्रकार स्थानीय रूप से संवेदी पहलो के माध्यम से समर्थित और मजबूत बनाया जा सकता है और उन्हें वैश्विक स्तर पर प्रतिबध्दताओं के साथ समाहित किया जा सकता है। जुलाई, 2006 में बिहार उत्तरी भारत का ऐसा पहला राज्य बन गया जिसने राज्य में एड्स मुद्दों की ओर ध्यान देने के प्रयोजन से निर्वाचित प्रतिनिधियों के लिए एक औपचारिक विधान तथा संस्थानगत तंत्र सहित एक विधायी मंच का गठन किया था। “एचआईवी तथा एड्स पर बिहार विधायी मंच” की शुरूआत राज्य में सभी स्तरों पर राजनैतिक नेताओं के बीच जागरूकता बढ़ाने और एड्स द्वारा प्रस्तुत चुनौतियों का सामना करने के लिए सभी क्षेत्रों की अपेक्षतया मजबूत क्षमता की सहायता करने के एक मार्ग के रूप की गई थी।
मंच की स्थापना के बाद से बिहार के नेता अपने राजनैतिक हमजोलियों के साथ इस दृष्टिकोण की हिमायत कर रहे हैं। भारत के उत्तरी क्षेत्र में छ: अन्य राज्यों ने भी अब बिहार मॉडल अपनाने के प्रति अपनी प्रतिबध्दता व्यक्त की है। तथापि इस बात पर बल दिया गया कि नेताओं की प्रतिबध्दता सफल एड्स जवाबी कार्रवाई के लिए विभिन्न उपायों में से मात्र एक उपाय है। बिहार विधानसभा में अपने भाषण में डॉ. पीटर पायट ने कहा कि राज्य को सभी एड्स क्रियाकलापों को लेकर मजबूत नेतृत्व की चुनौती, प्रबंध और समन्वय तथा एचआईवी संक्रमण की प्रभावी रोकथाम और उपचार के वास्ते बिहार के सभी व्यक्तियों तक पहुंचने की चुनौती का सामना करना है। सर सूमा चक्रवर्ती ने बलपूर्वक यह कहा कि श्सही संदेश का प्रसार करने के लिए कार्रवाई की जरूरत है जिससे कि लोग विशेष रूप से महिलाएं अपना बचाव कर सकें। साथ ही एचआईवी से ग्रस्त व्यक्तियों को जो लांछन और भेदभाव सहन करना पड़ता है उससे निपटने के लिए भी तात्कालिक कार्रवाई भी जरूरी है।
दौरे के एक अंग के रूप संयुक्त शिष्टमंडल ने सरकार, विधायिका, सिविल सोसायटी, संयुक्त राष्ट्र स्टाफ तथा दाता एजेंसियों के प्रतिनिधियों के साथ मुलाकात की जिससे कि सभी स्तरों पर एड्स नियंत्रण के लिए संसाधनों के तालमेल में सुधार लाने के तरीके ढूंढ़े जा सके। शिष्टमंडल ने यह सिफारिश की कि विकास भागीदारों के तकनीकी और वित्तीय संसाधनों को इकट्ठा कर लिया जाना चाहिए जिससे कि यह सुनिश्चित हो सके कि बिहार एड्स जवाबी कार्रवाई इस महामारी की बढ़ती हुई प्रकृति के साथ बनी रह सके और यह भी सुनिश्चित किया जा सके कि तकनीकी और वित्तीय सहायता सभी उच्च जोखिम समूहों तक पहुंचने के लिए राज्य एड्स नियंत्रण सोसायटी की जरूरतों के अनुरूप है। बिहार विधायी मंच से बातचीत करते हुए डॉ. पीटर पायट ने यह तर्क दिया कि ''राज्य एड्स नियंत्रण सोसायटी को बिहार में एचआईवी नियंत्रण कार्यक्रम की प्रगति के संबंध में आपको, जनप्रतिनिधियों को नियमित रूप से सूचित करते रहना चाहिए।''
यूनाइटेड किंगडम और यूएनएड्स के बीच संयुक्त मिशन ने सहयोगात्मक संधारणीय वित्तपोषी और तकनीकी सहायता तंत्रों और राष्ट्र के नए एड्स कार्यक्रम के संदर्भ में संसाधनों का मेल बैठाने के मुद्दे पर चर्चा करने का एक मौका दिया। शिष्टमंडल ने राष्ट्रीय जवाबी कार्रवाई के अगले चरण की सहायता की संयुक्त राष्ट्रीय योजना की समीक्षा भी की।

बाएं से दाएं भारतीय वित्त मंत्री पी. चिदंबरम सोमवार, 18 दिसम्बर, 2006 को नई दिल्ली में नार्थ ब्लाक में डॉ. पीटर पायट, कार्यकारी निदेशक, यूएनएड्स तथा सर सूमा चक्रवर्ती, स्थायी सचिव, डिपार्टमेंट फार इंटरनेशनल डेवलपमेंट (डीएफआईडी) के साथ बातचीत करते हुए
संप्रति भारत में लगभग 5.7 मिलियन लोग एचआईवी से ग्रस्त हैं जिनमें से लगभग 33% महिलाएं हैं। एचआईवी संचरण का प्रमुख माध्यम असुरक्षित इतरलिंगी यौन संबंध (86%) के जरिए है। राष्ट्रीय एड्स नियंत्रण संगठन (नाको) के अनुसार भारत में सूचित एड्स मामलों में से एक तिहाई मामले 15 से 29 वर्ष के बीच की आयु के युवा वर्ग से जुड़े हुए हैं। भारत ने प्रधान मंत्री की अधयक्षता में अपनी एड्स जवाबी कार्रवाई को आगे बढ़ाया है। राष्ट्रीय एड्स नियंत्रण कार्यक्रम चरण ॥। के अधीन एक व्यापक समन्वित बहुक्षेत्रीय जवाबी कार्रवाई 2007 के आंरभ तक शुरू किए जाने के लिए तैयार हो जाएगी।
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