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एड्स विशेषज्ञों के अनुसार बिहार को अभी भी अपनी एड्स नियंत्रण योजना के पैमाने में भारी वृध्दि करने की जरूरत है लेकिन उसका अनुकरणीय राजनैतिक अभिप्रेरण प्रशंसा के योग्य है

एड्स विशेषज्ञों के अनुसार बिहार को अभी भी अपनी एड्स नियंत्रण योजना के पैमाने में भारी वृध्दि करने की जरूरत है लेकिन उसका अनुकरणीय राजनैतिक अभिप्रेरण प्रशंसा के योग्य है

पटना, भारत, 16 दिसम्बर, 2006: भगवान बुध्द की भूमि और ज्ञान के उद्गम बिहार राज्य को एचआईवी/एड्स जागरूकता, रोकथाम, देखभाल और सहायता के लिए अपने कार्यक्रम में नाटकीय रूप से वृध्दि करने की जरूरत है। इन लक्ष्यों की पूर्ति करने की दिशा में बिहार के राजनैतिक नेताओं की प्रतिबध्दता की यूनाइटेड किंग्डम तथा एचआईवी/एड्स के संयुक्त राष्ट्र कार्यक्रम (यूएनएड्स) के एड्स नेताओं द्वारा सराहना की गई है। बिहार की राज्य सरकार के निमंत्रण पर बिहार के एक दिन के दौरे पर आए सर सुमा चक्रवर्ती, स्थायी सचिव, डिपार्टमेंट आफ इंटरनेशनल डेवलपमेंट (डीएफआईडी), यूनाइटेड किंग्डम तथा यूएनएड्स के कार्यकारी निदेशक डॉ. पीटर पायट और संयुक्त राष्ट्र के महा अवर सचिव ने राज्य में शीर्षस्थ राजनीतिज्ञों के साथ मुलाकात की और विश्वविद्यालय का दौरा किया। उन्होंने एड्स के वृध्दि लड़ाई के क्षेत्र में राजनैतिक नेताओं की सराहना की। उन्होंने एचआईवी महामारी के प्रति एक विकेन्द्रीकृत जवाबी कार्रवाई को मजबूत बनाने के वास्ते विकास भागीदारों की ओर से सतत राजनैतिक प्रतिबध्दता, अधिक सहायता तथा निर्वाचित प्रतिनिधियों की सतत भागीदारी के लिए आह्वान किया।

जुलाई, 2006 में बिहार उत्तरी भारत का ऐसा पहला राज्य बन गया जिसने राज्य में एड्स मुद्दों की ओर ध्यान देने के प्रयोजन से निर्वाचित प्रतिनिधियों के लिए एक औपचारिक विधान तथा संस्थानगत तंत्र सहित एक विधायी मंच का गठन किया था। ''एचआईवी तथा एड्स पर बिहार विधायी मंच'' की शुरूआत पंचायती राज संस्थानों सहित राज्य में सभी स्तरों पर राजनैतिक नेताओं के बीच जागरूकता बढ़ाने और एड्स द्वारा प्रस्तुत चुनौतियों का सामना करने के लिए सभी क्षेत्रों की अपेक्षतया मजबूत क्षमता की सहायता करने के एक मार्ग के रूप की गई थी।

मंच की स्थापना के बाद से बिहार के नेता अपने राजनैतिक साथियों के साथ इस दृष्टिकोण की हिमायत कर रहे हैं। भारत के उत्तरी क्षेत्र में छ: अन्य राज्यों ने भी अब बिहार माडल अपनाने के प्रति अपनी प्रतिबध्दता व्यक्त की है। तथापि इस बात पर बल दिया गया कि नेताओं की प्रतिबध्दता सफल एड्स जवाबी कार्रवाई के लिए विभिन्न उपायों में से मात्र एक उपाय है।

बिहार विधानसभा में अपने भाषण में डॉ. पीटर पायट ने कहा कि राज्य को ''सभी एड्स क्रियाकलापों को लेकर मजबूत नेतृत्व, प्रबंध और समन्वय की चुनौती तथा एचआईवी संक्रमण की प्रभावी रोकथाम और उपचार के वास्ते बिहार के सभी व्यक्तियों तक पहुंचने की चुनौती का सामना करना है।''

सर सुमा चक्रवर्ती ने बलपूर्वक यह कहा कि ''सही संदेश का प्रसार करने के लिए कार्रवाई की जरूरत है जिससे कि लोग, विशेष रूप से महिलाएं अपना बचाव कर सकें। साथ ही एचआईवी से ग्रस्त व्यक्तियों को जो लांछन और भेदभाव सहन करना पड़ता है उससे निपटने के लिए भी तात्कालिक कार्रवाई भी जरूरी है।''

दौरे के एक अंग के रूप संयुक्त शिष्टमंडल ने सरकार, विधायिका, सिविल सोसायटी, संयुक्त राष्ट्र स्टाफ तथा दाता एजेंसियों के प्रतिनिधियों के साथ मुलाकात की जिससे कि सभी स्तरों पर एड्स नियंत्रण के लिए संसाधनों के तालमेल में सुधार लाने के तरीके ढूंढ़े जा सके। शिष्टमंडल ने यह सिफारिश की कि विकास भागीदारों के तकनीकी और वित्तीय संसाधनों को इकट्ठा कर लिया जाना चाहिए जिससे कि यह सुनिश्चित हो सके कि बिहार एड्स जवाबी कार्रवाई इस महामारी की बढ़ती हुई प्रकृति के साथ बनी रह सके और यह भी सुनिश्चित किया जा सके कि तकनीकी और वित्तीय सहायता सभी उच्च जोखिम समूहों तक पहुंचने के लिए राज्य एड्स नियंत्रण सोसायटी की जरूरतों के अनुरूप हो। बिहार विधायी मंच से बातचीत करते हुए डॉ. पीटर पायट ने यह तर्क दिया कि ''राज्य एड्स नियंत्रण सोसायटी को बिहार में एचआईवी नियंत्रण कार्यक्रम की प्रगति के संबंध में आपको, जनप्रतिनिधियों को नियमित रूप से सूचित करते रहना चाहिए।''

बिहार के दौरे के मौके पर संयुक्त शिष्टमण्डल ने एचआइवी रोकथाम, उपचार और सहायता सहित एक बहु-क्षेत्रीय और व्यापक जवाबी कार्रवाई की जरूरत पर बल दिया। ऐसी व्यापक जवाबी कार्रवाई से निचले स्तर की किसी भी कार्रवाई द्वारा यह सुनिश्चित नहीं किया जा सकेगा कि एचआइवी से ग्रस्त तथा संक्रमण के उच्च जोखिम वाले सभी व्यक्तियों को ये सुविधाएं सुलभ हो सकेंगी। डीएफआईडी तथा यूएनएड्स ने एड्स महामारी के नियंत्रण में बिहार के सतत प्रयासों के लिए उसकी सराहना की।

सम्पादक के लिए टिप्पणी

बिहार की राज्य सरकार के निमंत्रण पर डीएफआईडी तथा यूएनएड्स के नेताओं द्वारा संयुक्त मिशन ने एड्स महामारी के लिए स्थानीय जवाबी कार्रवाई को मजबूत बनाने के लिए कार्यनीतियों पर चर्चा करने का एक अवसर प्रदान किया।

राज्य ने राज्य में एड्स कार्यक्रम अभिशासन का सुदृढ़ीकरण करने तथा कार्यकारी और विधिक कार्रवाइयों को एचआईवी महामारी के प्रति एक समन्वित जवाबी कार्रवाई में एकीकृत करने के लिए एक राज्य परिषद स्थापित करके 'तीन एक' सिध्दान्त अंगीकार किए हैं और उनका प्रयोग किया है--सभी सहभागियों के समन्वय के लिए एक राष्ट्रीय एड्स तंत्र, एक राष्ट्रीय एड्स नियंत्रण प्राधिकारी तथा मानीटरन और मूल्यांकन के लिए एक प्रणाली।

बिहार के कुछेक जिलों में एचआईवी की तेजी से बढ़ती हुई व्याप्ति के कारण हाल ही में एक बड़ी चिन्ता उभर आई है भले ही राज्य में अभी भी व्याप्ति दर 0.9% की राष्ट्रीय औसत से कम है। महामारी के सामाजिक कारण इसे विशेष रूप से जोखिमपूर्ण बनाते हैं।

बिहार के हर छ: पुरुषों में से एक पुरुष काम की तलाश में महानगरों में चला जाता है। एचआईवी के साथ जुड़ा हुआ लांछन सामाजिक दृष्टि से अलग-थलग पड़े समुदायों को दोहरे तौर पर सीमान्त कर देता है। सेक्स वर्करों की गतिविधियों और कन्डोम के अल्प प्रयोग के कारण राज्य के जोखिम उसकी अंतर्राष्ट्रीय सीमाओं के चलते और भी बढ़ जाते हैं। हाल ही में बिहार राज्य एड्स नियंत्रण सोसायटी ने सेक्स वर्करों, पुरुषों के साथ यौन संबंध रखने वाले पुरुषों और इंजेक्शन के माध्यम से नशीली दवाओं का सेवन करने वालों के बीच एचआईवी की व्याप्ति में वृध्दि की जानकारी दी है।

एचआईवी तथा एड्स संबंधी बिहार राज्य विधायी मंच की कार्ययोजना, एचआईवी तथा एड्स पर जून, 2006 में आयोजित संयुक्त राष्ट्र महासभा के विशेष अधिवेशन में की गई राजनैतिक प्रतिबध्दता की भावना को आत्मसात करती है। स्थानीय जवाबी कार्रवाई को मजबूत बनाना विशेष अधिवेशन का प्रमुख संदेश था। बिहार में इसके कार्यान्वयन के लिए राज्य विधायिका को नियमित रूप से रिपोर्ट भेजने वाली एक सुदृढ़ीकृत राज्य एड्स नियंत्रण सोसायटी द्वारा समन्वित सभी आर्थिक क्षेत्रों का जोरदार सहयोजन जरूरी होगा।

डीएफआईडी तथा यूएनएड्स--दोनों के लिए बिहार एक धयातव्य राज्य है। डीएफआईडी ने राज्य एड्स नियंत्रण सोसायटी को अपनी द्विपक्षीय सहायता के अधीन राज्य को काफी सहायता प्रदान की है। यूएनएड्स ने राज्य नेतृत्व को सहायता प्रदान की है और बिहार को उसकी ‘वंचना की स्थिति’ से उबरने में मदद करने के लिए तकनीकी सहायता प्रदान की है।

संप्रति, भारत में लगभग 5.7 मिलियन लोग एचआईवी/एड्स (5.2 मिलियन 15-49 वर्ष में से) ग्रस्त हैं जिनमें से लगभग 39% महिलाएं हैं। एचआईवी संचरण का प्रमुख माध्यम असुरक्षित यौन संबंध (86%) के जरिए है। भारत में एड्स मामलों में से एक तिहाई मामले (15 से 29 वर्ष के बीच की आयु के) युवा वर्ग से जुड़े हैं। भारत ने प्रधान मंत्री की अधयक्षता में अपनी एड्स जवाबी कार्रवाई को आगे बढ़ाया है। राष्ट्रीय एड्स नियंत्रण कार्यक्रम चरण ॥। के अधीन एक व्यापक समन्वित बहुक्षेत्रीय जवाबी कार्रवाई 2007 के आरम्भ तक शुरू किए जाने के लिए तैयार हो जाएगी।

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नोबल थलारी (यूएनएड्स इंडिया) +91.93122.20671-thalarain@unaids.org

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