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भारत सरकार द्वारा एचआईवी तथा एड्स के विरुध्द ग्रासरूट स्तर पर स्वयं लाभग्राहियों तक पहुंचने के अभी तक के सबसे विशाल कार्यक्रम की शुरूआत

प्रतिबध्दता का वचन - दिल्ली संकल्प
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भारत सरकार द्वारा एचआईवी तथा एड्स के विरुध्द जमीनी स्तर पर स्वयं लाभग्राहियों तक पहुंचने के अभी तक के सबसे विशाल कार्यक्रम की शुरूआत

एड्स के विरुध्द लड़ाई में भारत की पंचायत प्रणाली का सहयोग

नई दिल्ली, 8 अगस्त : एचआईवी तथा एड्स के विरुध्द लड़ाई को मजबूत करने के लिए निर्वाचित प्रतिनिधियों तक स्वयं पहुंचने के अब तक के सबसे विशाल कार्यक्रम में जिला परिषद अध्यक्षों और महापौरों का पहला राष्ट्रीय सम्मेलन विज्ञान भवन, नई दिल्ली में आयोजित किया गया।

यह सम्मेलन जिला स्तर पर एचआईवी और एड्स के विरुध्द लड़ाई लड़ने के लिए स्थानीय अभिशासन तंत्रों - पंचायती राज और नगरपालिका संस्थानों को पहली पंक्ति में खड़ा कर देता है। इसका उद्देश्य ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में स्थानीय रूप से निर्वाचित नेताओं के देशव्यापी समुदाय के साथ जिसमें नीतियों, कार्यक्रम निर्माण और संसाधन प्रबंध को प्रभावित करने की क्षमता है भागीदारी का निर्माण करना है।

जबसे भारत में एचआईवी रोगियों की संख्या की तरफ दुनिया का ध्यान गया है, तभी से देश ने एचआईवी के विरुध्द लड़ाई में लोकप्रिय सहयोग प्राप्त करने के लिए विशाल आंदोलन शुरू कर दिया है। यह पहलकदमी ग्रासरूट स्तर पर स्थानीय प्रतिक्रियाओं को सुदृढ़ बनाने की दिशा में एक कदम है जिससे कि समुदायों को एचआईवी के प्रति समुत्थानशील बनाया जा सके। भारत सरकार यूएनजीएएसएस 2006 वैश्विक प्रतिबध्दताओं के प्रति पूर्णता: वचनबध्द है। जिला परिषद पहलकदमी केवल यही नहीं कि समुदायों और परिवारों तक पहुंचने का एक मार्ग है बल्कि एक राष्ट्रीय तंत्र के अधीन देश में अभिशासन के विभिन्न स्तरों को सहयोजित करके '3 एक' का रूपांतरण भी है।

प्रशासनिक और सामुदायिक नेतृत्व की दोहरी जिम्मेदारियों से युक्त जिला परिषद अध्यक्ष और महापौर काफी अधिक प्रभाव रखते हैं जिसे जागरूकता पैदा करने और एचआईवी के विरुध्द अभियान में कलंक को दूर करने की दिशा में सकारात्मक रूप से निर्देशित किया जा सकता है। अनेक राज्यों में जिला विकास परिषदों के अध्यक्षों के नाते वे यह सुनिश्चित कर सकते हैं कि एचआईवी से संबंधित मुद्दों की ओर समुचित आयोजना और बजटीय आबंटन के माध्यम से ध्यान दिया जाता है। समुदाय के नेताओं के रूप वे इस महामारी के संबंध में भ्रांतियां दूर करके कलंक और भेदभाव की ओर ध्यान दे सकते हैं।

यह सम्मेलन भारत सरकार (स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय, शहरी विकास मंत्रालय तथा पंचायती राज मंत्रालय), नैको, एचआईवी/एड्स संबंधी सांसद मंच और यूएनएड्स की एक संयुक्त पहल के रूप है। एचआईवी महामारी के विरुध्द लड़ाई में सहयोग देने की एक चेष्टा के रूप 500 से अधिक जिला परिषद अध्यक्षों (जेडपीए) तथा महापौरों ने इस सम्मेलन में भाग लिया है।

श्री आस्कर फर्नांडीज, केन्द्रीय मंत्री और संयोजक, एचआईवी/एड्स संबंधी सांसद मंच; श्री मणिशंकर अय्यर, केन्द्रीय पंचायत राज मंत्री; डॉ. अंबु मणि रामदास, केन्द्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्री; श्री जयपाल रेड्डी, केन्द्रीय शहरी विकास मंत्री, सुश्री के. सुजाता राव, महानिदेशक, नैको तथा डॉ. डेनिस ब्राउन, देश निदेशक, यूएनएड्स ने प्रतिनिधियों को संबोधित किया।

इस सम्मेलन में ग्रामीण और शहरी हालात में इस महामारी की विशिष्ट स्थितियों के बारे में जिला परिषद अध्यक्षों और महापौरों के साथ चर्चा की गई। एचआईवी संबंधी लक्ष्यों और कार्यक्रमों का आदान-प्रदान किया गया जिससे कि सारे राष्ट्र के भीतर पूर्ण क्रियान्वयन का लक्ष्य पूरा किया जा सके। विकेन्द्रीकृत प्राधिकारियों का सहयोग प्राप्त करने में यह सम्मेलन राष्ट्रीय एड्स नियंत्रण कार्यक्रम चरण III में अभिकल्पित विकेन्द्रीकृत आयोजना का आधार बन जाता है।

राष्ट्रीय एड्स नियंत्रण संगठन (नैको) के अनुसार 2005 के अंत में भारत में 15 से 45 वर्ष के आयु वर्ग में एचआईवी से ग्रस्त व्यक्तियों की अनुमानित संख्या 5.21 मिलियन थी। इनमें से लगभग 60% ग्रामीण क्षेत्रों से संबंधित हैं (एचएसएस 2005)। ग्रामीण क्षेत्र में इस रोग की व्याप्ति की संभावनाएं अनेक कारणों से बढ़ जाती हैं जिनमें गरीबी, प्राकृतिक आपदाएं, अज्ञान, लैंगिक विषमताएं और स्वास्थ्य देखभाल सुविधाओं की सीमित सुलभता शामिल है।

पंचायती राज और नगरपालिका संस्थानों के व्यापक नेटवर्क की पहुंच सुदूर क्षेत्रों में मौजूद परिवारों तक है और इसलिए उनके भीतर भारत में इस महामारी की स्थिति में अंतर लाने और साथ ही एचआईवी के साथ जी रहे लोगों के जीवन स्तर में सुधार लाने की क्षमता मौजूद है।

ब्लाक और ग्राम स्तरों पर जेडपीए के प्रभाव और पहुंच को देखते हुए वे महत्वपूर्ण अंतर लाने के लिए समन्वय कर सकते हैं, उसे सुकर बना सकते हैं और उसका पक्षपोषण कर सकते हैं। जिला पंचायतों के अध्यक्षों के पास कुछ कार्यनीतिक लाभ होते हैं जिनके बल पर वे जिले में एचआईवी कार्यसूची को प्रभावित कर सकते हैं:

  • जिला विकास योजनाओं को प्रभावित करना जिससे कि यह सुनिश्चित हो सके कि एचआईवी संबंधी क्रियाकलाप शामिल कर लिए गए हैं और समुचित बजट आबंटित कर लिया गया है।
  • जिला पंचायतों की अपनी निधियां सीधे ही आबंटित करना और सरकारी सहायताप्राप्त स्कीमों के त्वरित कार्यान्वयन को प्रभावित करना।
  • विभिन्न विभागों (विशेष रूप से स्वास्थ्य और शिक्षा) के अध्यक्षों के समक्ष इस आशय का पक्षपोषण करना कि वे ऐसी प्रणालियां लागू करें जिससे कि कलंक और भेदभाव कम करने में मदद मिल सके और समुदायों को जो उनकी सेवाएं प्राप्त करते हैं संगत जानकारी और रेफरल प्रदान किए जाएं।
  • समुदाय के नेताओं के रूप कलंक और भेदभाव की ओर ध्यान देने के लिए एचआईवी की बाबत बात करना।
  • राजनैतिक प्रतिनिधियों के रूप एचआईवी को उच्च राजनैतिक कार्यसूची में शामिल किए जाने के लिए पक्षपोषण करना। यह सम्मेलन जेडपीए तथा महापौरों द्वारा प्रतिबध्दता की एक घोषणा के साथ समाप्त हुआ जिसमें उन्होंने जिला और सामुदायिक स्तरों पर एचआईवी प्रतिक्रिया में अपने सर्वाधिक निष्ठापूर्ण समर्पण का वचन दिया था।
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