एचआईवी/एड्स पर कार्रवाई करने के लिए बिहार द्वारा विधायी मंच की शुरूआत
पटना, 24 जून: राज्य में एचआईवी के प्रसार पर काबू पाने की दिशा में एक पथ-प्रदर्शक प्रयास के रूप बिहार के माननीय मुख्यमंत्री श्री नितीश कुमार तथा बिहार विधान सभा के माननीय अध्यक्ष श्री उदय नारायण चौधरी ने आज विधान सभा ऐनेक्सी सभागार में एचआईवी/एड्स पर बिहार विधायी मंच (बीएलएफए) की स्थापना की।
इस विधायी मंच की स्थापना करने का उद्देश्य निर्वाचन क्षेत्र और सामुदायिक स्तरों पर महामारी को रोकने के लिए कार्यनीतियों पर विचार करना था। इस ऐतिहासिक शुरूआत के समय नैको के प्रतिनिधि, यूएनएड्स देश निदेशक डॉ डेनिस ब्राउन, एचआईवी तथा एड्स संबंधी सांसद मंच के कोर सदस्य श्री जे.डी. सीलम, बिहार के स्वास्थ्य मंत्री श्री चन्द्रमोहन राय, यूनीसेफ, बिहार के राज्य प्रतिनिधि श्री बिजय राज भंडारी तथा विभिन्न अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।
पिछली सरकार में मंत्री श्री अब्दुल बरी सिद्दीकी द्वारा एचआईवी/एड्स पर बिहार विधायी मंच की स्थापना के बारे में एक प्रस्ताव प्रस्तुत किया गया जिसे सर्वसम्मति से पारित कर दिया गया।
बिहार विधान सभा के अध्यक्ष श्री उदय नारायण चौधरी ने अपने स्वागत भाषण में यह कहा कि 'हम यह समझ चुके हैं कि एचआईवी का प्रसार कितना विनाशकारी हो सकता है। स्थिति बहुत भयावह है। एचआईवी के प्रसार के विभिन्न पक्षों की बाबत लोगों को जागृत करने के लिए हमारा बीएलएफए पंचायत स्तर तक जाएगा। हाल ही में लगभग 2 लाख पंचायत प्रतिनिधियों का चुनाव हुआ है और उनमें से आधी महिलाएं हैं। ग्रासरूट स्तर पर लोगों को एचआईवी के बारे में जागरूक करने की दिशा में ये महिलाएं एक अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।' बीएलएफए के गठन के लिए इस संगोष्ठी का आयोजन करने के निमित्त श्री उदय नारायण चौधरी ने पहल की थी।
राज्य में तत्काल और समेकित कार्रवाई किए जाने की जरूरत को स्वीकार करते हुए बिहार के माननीय मुख्यमंत्री श्री नितीश कुमार ने राज्य और ब्लाक स्तर पर स्वास्थ्य आधारिक तंत्र के विस्तार के साथ-साथ जनजागरूकता अभियान का सुदृढ़ीकरण करने का आग्रह किया। माननीय मुख्यमंत्रीजी ने राज्य में स्वत: नष्ट हो जाने वाली सिरिंजों करने का भी प्रस्ताव रखा।
श्री बिजय राज भंडारी ने थाईलैंड के एक पूर्व उप-प्रधानमंत्री के ये शब्द दोहराएं 'एचआईवी एड्स अनुभव से जो हमने प्रमुख बातें सीखी हैं उनमें से एक यह है कि नेताओं को महामारी के विनाशकारी पैमाने को अवश्य स्वीकार करना चाहिए और उन्हें एचआईवी/एड्स समस्या की विशालता के बारे में खुलकर चर्चा करने के लिए तत्पर रहना चाहिए'। उन्होंने यह भी कहा कि 'मैं देख रहा हूं कि आज बिहार का नेतृत्व इस स्थिति के लिए तैयार है। इस महान पहलकदमी के लिए मैं एक बार फिर आपका नमन करता हूं।' यूएनएड्स के देश निदेशक डॉ. डेनिस ब्राउन ने कहा 'विजय केवल ऐसे देशों और राज्यों में आई है जहां राजनैतिक नेतृत्व पूरी तरह प्रवृत्त था और एड्स को एक प्राथमिकता घोषित किया गया था'।
उन्होंने आगे यह भी कहा कि जिन देशों ने इस रोग को नकारा है और अनदेखी की है वहां एड्स पनपा है। कोफी अन्नान के शब्दों में 'नकारने और निष्क्रियता का मूल्य समग्र आर्थिक ध्वंस से लेकर सभ्यताओं के उन्मूलन तक का हो सकता है।' उन्होंने आगे यह भी कहा कि 'आज इस मंच की स्थापना करके आपने एक ऐसी महत्वपूर्ण कड़ी का सृजन किया है जोकि एड्स के खिलाफ बिहार की विजय की कुंजी होगी।'
डॉ. डेनिस ब्राउन ने एड्स के प्रसार को रोकने में विधायकों द्वारा निर्वाह की जाने वाली भूमिकाएं अभिज्ञात की। उन्होंने सुझाया कि 'विधि निर्माताओं के रूप विधायक समानता, गोपनीयता और सम्मान को सुरक्षित रखने के लिए जानकारी, निवारण, उपचार की सर्वसुलभता आश्वस्त करने के वास्ते कानून बनाने और पारित करने में मदद कर सकते हैं।' उन्होंने यह कहा कि 'जनता और सरकार के बीच एक कड़ी के रूप विधायकों को एड्स जागरूकता और कार्रवाई के लिए एक जनमत तैयार करने के उद्देश्य से समुदायों, मत निर्माता नेताओं और पीआरआई संस्थानों को सहयोजित करना चाहिए।'
डॉ. ब्राउन ने विधायकों को योजनाएं, बजट बनाने और समुदाय के स्तर पर स्थानीय जवाबी कार्रवाईयों को सुदृढ़ बनाने के निमित्त तंत्रों का मानीटरन करने के लिए भी आग्रह किया। जन प्रतिनिधियों के लिए डॉ. ब्राउन का संदेश इस प्रकार था 'लोगों के नायक के रूप कलंक और भेदभाव के विरुध्द संघर्ष करें जिससे कि सभी के लिए मानव अधिकार सुनिश्चित हो सकें।'
दक्षिण अफ्रीका सहित भारत में 14-49 वर्ष के आयु वर्ग में आधा करोड़ नागरिक एचआईवी से ग्रस्त होने के कारण इन अर्थों में भारत का स्थान विश्व में सर्वोच्च है। बिहार एक मूक महामारी झेल रहा है लेकिन इसकी मात्रा बढ़ती हुई प्रतीत हो रही है। आज की तारीख में बिहार में अनुमानत: एक लाख लोग एचआईवी से ग्रस्त हैं। बिहार में 10 जिलों को पहले ही उच्च व्याप्ति वाले जिलों के रूप वर्गीकृत किया जा चुका है। इस मंच की स्थापना इससे अधिक सामयिक नहीं हो सकती थी।
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