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राष्ट्रीय एड्स नियंत्रण कार्यक्रमण, चरण-॥। (2006-2011)

लक्ष्य और उद्देश्य
मार्गदर्शी सिध्दांत
कार्यक्रम की प्राथमिकताएं और मुख्यक्षेत्र
रोकथाम की रणनीतियां
रोकथाम के लिए सेवाएं
देखरेख और सहायता
उपचार
मानीटरिंग, मूल्यांकन और शोध
निगरानी
एनएसीपी-॥। का सारांश
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राष्ट्रीय एड्स नियंत्रण कार्यक्रम, चरण-III(2006-2011)

पिछले कुछ वर्षों में एचआईवी/एड्स की महामारी शहरी भारत से ग्रामीण भारत की ओर और उच्च जोखिम वाले समूहों से आम आबादी की दिशा में फैली है जिसने मुख्यत: युवाओं को प्रभावित किया है। भारत में 15 से 49 वर्ष तक के 25 लाख लोग एचआईवी/एड्स के साथ जी रहे हैं। इस संख्या की दृष्टि से भारत विश्व में दूसरे स्थान पर है। देश में एचआईवी/एड्स की व्याप्ति दर 0.36 प्रतिशत है। यहां अधिकतर एचआईवी संक्रमण्ा महिला-पुरुष यौन संपर्क द्वारा होते हैं।

किंतु देश के पूर्वोत्तार भाग में इस महामारी के फैलने की पहली वजह नशीली दवाओं की सुई लगाना है और यौन संचरण दूसरा कारण है।

एचआईवी व्याप्ति की इस स्थिति को देखते हुए एनएसीपी-॥। का मुख्य सरोकार है अगले पांच वर्षों में इस महामारी को रोकना और कम करना। यह कार्यक्रम अपने उपायों द्वारा इस लक्ष्य को प्राप्त करने की आशा करता है। ये उपाय इस प्रकार हैं - लक्ष्यबध्द हस्तक्षेपों के साथ उच्च जोखिम वाले समूहों को परिधि में लेना, सामान्य आबादी के लिए हस्तक्षेपों का विस्तार करना; और जिला, राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर रोकथाम, देखरेख और सहायता के लिए प्रणालियों और मानव संसाधनों का समाकलन और वृध्दि।

अपनी पहुंच को प्रभावकारी बनाने के लिए एनएसीपी-॥। अपने कार्यान्वयवन ढांचे को जिला स्तर तक विकेंद्रीकृत करना चाहता है। इसके अलावा पूर्वोत्तार में क्षेत्रीय एड्स नियंत्रण इकाई जो कि नैको का उपसमूह है, इस क्षेत्र में मौजूद विशेष जोखिम को लेकर काम करेगी।

एक राष्ट्रव्यापी रणनीतिक सूचना प्रबंधन वाली इस महामारी पर नजर रखने, संक्रमण के मुख्य क्षेत्रों की पहचान करने और इस संक्रमण के भार का आकलन करने के लिए नियोजन, मानीटरिंग, मूल्यांकन, निगरानी और शोध का कार्य करती है। ये उपाय नये संक्रमणों को उच्च व्याप्ति वाले राज्यों में 60 प्रतिशत और जोखिम वाले राज्यों में 40 प्रतिशत तक काम कर सकते हैं।

एनएसीपी-॥। साथ ही एचआईवी/एड्स के साथ जीने वाले लोगों के जिला स्तरीय नेटवर्क को प्रोन्नत करने का प्रयास करती है। वह एचआईवी पोजिटिव लोगों के लिए पोषण सहायता और आय-जनन और अन्य कल्याणकारी कार्यों के अवसर प्रदान करने में कल्याणकारी संस्थाओं की सक्रिय भूमिका चाहती है।

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