यूएनएड्स भारत कार्यालय
एचआईवी एड्स पर संयुक्त राष्ट्र संघ कार्यक्रम (यूएनएड्स) इस महामारी पर भूमंडलीय कार्रवाई का मुख्य पैरोकार है। इसने इस महामारी से लड़ने के साझे प्रयास में 10 राष्ट्र संघ एजेंसियों को एकजुट किया है। सह-प्रायोजकों में यूएनएचसीआर,, युनिसेफ, डब्ल्यूएफपी, यूएनडीपी, यूएनएफपीए, यूएनओडीसी, आईएलओ, यूनेस्को, डब्ल्यूएचओ और विश्व बैंक शामिल है।
यूएनएड्स का भूमंडलीय मिशन है इस महामारी के व्यापक प्रत्युत्तर का नेतृत्व, सुद्ढ़ीकरण और अनुसमर्थन करना जिसका उद्देश्य एचआईवी के संचरण की रोकथाम करना, देखरेख और सहायता प्रदान करना, एचआईवी/एड्स से व्यक्तियों और समुदाय की असुरक्षा में कमी लाना और महामारी के प्रभाव का शमन करना है।
भारत में यूएनएड्स क अधिदेश (मेंडेट) को एक संयुक्त एड्स राष्ट्र संघ दल और एचआईवी/एड्स पर गठित विषय समूह द्वारा क्रियान्वित किया जाता है। इसमें हर सह-प्रायोजनकर्ता के प्रतिनिध शामिल होते हैं। यूएनएड्स राष्ट्रीय एड्स नियंत्रण सोसाइटी और राज्य एड्स नियंत्रण सोसाइटियों, नागरिक समाज, शैक्षिक जगत, निजी क्षेत्र सहित अन्य मुख्य साझेदारों के साथ मिल कर एचआईवी के विरुध्द संघर्ष का नेतृत्व करने हेतु ज्ञान, कौशलों और अनुभव में हिस्सेदारी के लिए, घनिष्ठता से मिलकर कार्य करता है।
विशेष रूप से यूएनएड्स निम्नलिखित कार्यों को प्रोन्नत करके एचआईवी और एड्स के राष्ट्रीय प्रत्युत्तर में मदद करता है:
- सरकार, नागरिक समाज और एचआईवी के साथ जीने वाले लोगों सहित सभी स्तरों पर व्यापक-आधार पर प्रत्युत्तर देने के लिए मजबूत नेतृत्व और संसाधन लाभबंदी।
- बेहतर अनुश्रवण (मानीटरिंग) और मूल्यांकन से प्राप्त रणनीतिक जानकारी को और अधिक उपलब्ध कराने और उसके उपयोग के माध्यम से प्रत्युत्तर का सुदृढ़ साक्ष्य-आधार।
- सरकार, नागरिक समाज और अन्य गैर-राज्य साझेदारों के सभी स्तरों पर बढ़े हुए मानव संसाधन और मजबूत प्रयायगी प्रणालियां।
- लांछना और भेदभाव में कमी लाने के लिए मानव-अधिकार-आधारित और जेंडर-उत्तारदायी सुदृढ़ नीतियां।
- नशीली दवा की सुई लगाने वालों, पुरुषों के साथ यौन संपर्क करने वाले पुरुषों के लिए बढ़ा हुआ करवेज और कार्यक्रम का टिकाऊपन।
- महिलाओं और लड़कियों, युवा लोगों, आपात्काल-प्रभावित आबादी और वर्दीधारी कार्मियों की असुरक्षा को दूर करने के लिए बढ़ा हुआ कवरेज और कार्यक्रमों का टिकाऊपन।
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